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Tarun Bhartiya: राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रहे तरुण भारतीय को नमन कर रहे लोग। तरुण भारतीय भारत में राष्ट्र निर्माण के फ्रंट पर कई तरह की कोशिश करने में लगे थे।
राष्ट्र निर्माण के मुद्दे पर शिलांग में रहकर सक्रिय तरुण भारतीय की मृत्यु की खबर ने देश भर में अनेकों को स्तब्ध कर दिया.
25 जनवरी को 11:00 बजे दिन में त हार्ट अटैक से 58 वर्ष की अवस्था में तरुण की मृत्यु हुई. तरुण भारती मुद्दा बिहार के थे और आरंभिक स्कूली दिनों में पटना में थे.
शिलांग में घर परिवार बसाकर रहने वाले तरुण भारत में राष्ट्र निर्माण के फ्रंट पर कई तरह की कोशिश कर रहे थे।
* तरुण भारतीय का की असमय मृत्यु की खबर इधर के वर्षों में हमारे बीच सबसे दुखद और हृदय को सदमा देने वाली घटना है.
* अपने उम्र में असाधारण प्रतिभा के धनी तरुण भारती की हिंदी कविताएं उसकी डायरी से गायब कर उनके ही एक मित्र ने हंस के लिए दी थी और वहां प्रकाशित होने के बाद कवि रूप तरुण को लोग जान पाए. अंग्रेजी में भी तरुण ने कविताएं लिखी.
* उत्तर पूर्व की कुछ भाषा में लिखी गई कविता का तरुण ने हिंदी अनुवाद भी किया था.
* संजय काक द्वारा निर्मित और निर्देशित दो फिल्मों का तरुण भारती ने संपादन किया था. जश्ने आज़ादी और रेड ant ड्रीम.
* उसे पिछले दशक में भारत के फिल्म चित्र पुरस्कारों में नॉन फीचर फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ संपादक का पुरस्कार भी मिला था.
25 जनवरी 2025 को सुबह 3:00 बजे एक स्ट्रोक और फिर 8:00 बजे और फिर 11:00 बजे, हार्ट अटैक से तरुण की मृत्यु हुई. तरुण भारती 58 वर्ष के थे.
* तरुण की पत्नी एंजेला, बेटी Abia
* दो पुत्र Kyntang, Maian, के शोक में हम शामिल हैं.
* यह सभी शिलांग के निवासी हैं.
* तरुण मेरे खुद बनाए हुए समूह “डायनामिक ऑफ़ डेमोक्रेसी” समूह का सदस्य था और आरंभिक दिनों में कुछ-कुछ लिखा करता था
हमारे बीच इस उम्र के क्रिएटिव लोगों में सबसे अधिक, सृजनशील और डायनामिक पर्सनेलिटी, तरुण भारतीय को मैं तब से जानता हूं जब वह चौथे वर्ष का विद्यार्थी था.
इस परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ टूट रहा है. 2 वर्ष के अंदर पिता महेंद्र नारायण करण की मृत्यु सबसे बड़े बेटे को.
तरुण भारतीय अपनी पढ़ाई में विज्ञान में स्नातक और विज्ञान के बाद अर्थशास्त्र में और इसके बाद मास मीडिया कम्युनिकेशन से फिल्म निर्माण निर्देशन मैं अपनी पढ़ाई पूरा करने के बाद एनडीटीवी से संपादन की दुनिया में आया था.
समाज विज्ञान का अपने उम्र का विलक्षण मित्र. सोशल साइंस को अभी तक अपना गैलीलियो नहीं मिला है. परंतु मैं नेचर साइंस से सोशल साइंस में आने वाले व्यक्तियों में संभावना देखने में लगा रहता हूं.
अंग्रेजी और हिंदी की उसकी कविताएं. सब कुछ याद दिलाती रहने वाली है.
उसका कैनवस बहुत व्यापक था और भारत के क्रिएटिव लोगों में से अनेक लोगों के लिए तरुण भारती महत्वपूर्ण रहा.
( बेटी डॉक्टर क्रांति भावना और दामाद डॉक्टर सुदीप के साथ उर्मिला दी — तीनों उनके घर पहुंच गए थे। शिलांग जाते समय जब डॉक्टर सुदीप ने मुझे बताया , कि भैया की मृत्यु हो गई . तब मैंने सुदीप से पूछा कि आपका कोई बड़े भाई Hain? )
साल से ज्यादा समय बीता , जब सुदीप ने रात में मुझे बताया था, बड़े भाई महेंद्र नारायण कारण की मृत्यु हो गई.
तरुण करण साहब का बड़ा बेटा है.
सुदीप को यह बताना पड़ा कि तरुण भारतीय की मृत्यु हो गई.
जिसको भी यह खबर मिली आप सोच सकते हैं, वह एक बार में समझ नहीं पाया होगा.
और जैसा __ एक पोस्ट आया है, रवीश कुमार अपने यूट्यूब चैनल के लिए आए डायमंड बटन के पैकेट को दर्शकों के सामने खोलना के कार्यक्रम को शूट कर रहे थे.
बीच में रवीश को पता चला कि तरुण भारतीय नहीं रहे. तो बीच में ही रवीश ने कहा की हीरा व्यक्तित्व के बारे में, पाठकों से बीच में ही परिचित करना उचित है.
रवीश ने उनकी कुछ फिल्मों के बारे में बताया. ऊपर मैं संजय काक की फिल्मों के के संपादक तरुण का जिक्र किया है.
पटना में जब वह, यह फिल्म दिखाना चाहते थे , तब बीच पटना में हिंदी भवन नाम से प्रोफेसर जाबिर हुसैन एक सभागार और कैंपस विकसित करवा रहे थे.
हिंदी भवन के उद्घाटन के पहले ही इसके मुख्य सभागार को फिल्म प्रदर्शन के लिए दिया गया और संजय तथा तरुण की उपस्थिति में जश्ने आजादी फिल्म दिखलाया गया.
उसके बाद फिल्म देखने के बाद कश्मीर विषय पर चर्चा हुई.
बाद में पता चला.. .. जश्ने आज़ादी का प्रदर्शन विद्यार्थी परिषद के लोगों ने मुंबई और पुणे में होने ही नहीं दिया था.
फिल्म के बाद की चर्चा का संचालन करने के लिए मुझे कहा गया था और मैंने यह भरोसा दिलाया था की सवाल तीखे रूप में भी आ सकते हैं, परंतु सांप्रदायिक स्तर पर कोई भी आक्रमण पटना में नहीं होगा.
कश्मीर पर इस फिल्म के बहाने चर्चा हुई. और यह फिल्म तरुण भारतीय ही लेकर Patna आए थे.
उन्होंने बाद में बीबीसी के द्वारा मिले प्रोजेक्ट के आधार पर भारत से नेपाल के ट्रेन की कहानी के साथ दोनों देश के नागरिकों की और उनके बीच की बातों की कहानी कही थी.
एक और फिल्म का जिक्र आता है. ऑफ कैमरा यह तरुण की फिल्म hai. मैं इस योग्य नहीं हूं कि फिल्म निर्माण के उसके संसार की झलक यहां प्रस्तुत कर सकूं.
मुझे याद है कि महेंद्रू में , जब महेंद्र भाई रहते थे और हम उनके घर जाते थे , तब तरुण चौथे वर्ष का विद्यार्थी था
वह शिलांग से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद पढ़ाई के लिए दिल्ली आए थे.
जामिया मीडिया से तरुण ने मास मीडिया कम्युनिकेशन से डिप्लोमा डिग्री ली थी.
फिर एनडीटीवी में अपनी पहली नौकरी के साथ , दिल्ली मैं रहे थे और यहां से वह लंदन चले गए थे. बीबीसी उन्हें कभी काम के लिए और कभी अतिथि के रूप में बुलाया करता था.
. तरुण भारती नर्मदा बचाओ आंदोलन का समर्थक था और हम लोग बांध का विरोध जारी रखना के साथ नहीं थे. यहां मैं अपने वैचारिक पोजीशन को नहीं दोहराऊंगा.
पुनर्वास का काम पूरा करने में हमारे गुजरात के वाहिनी समूह के लोग लग गए थे और यही वजह है , कि तरुण ने पहली दफा मेरे वैचारिक पोजीशन पर अपनी तीखी टिप्पणी की थी.
वह अपनी जगह पर कायम था.
बाद में मेरी बेटी ने, जब ग्रेजुएशन कर लिया तब तरुण ने, मुझे यही ऑफर दिया कि , जुंबिश के लिए छुट्टियों में उसके घर शिलांग आ जाना अच्छा होगा.
शिलांग का एंजेला का घर भारत की कुछ प्रमुख महत्वपूर्ण हस्तियां के लिए डेरा के रूप में कई दफा खुला है.
तरुण की बड़ी बेटी और दो जुड़वा बेटे , तीनों ही , क्रमशः प्लस टू और कॉलेज के विद्यार्थी होते जा रहे हैं.
बीच में एक दिन एक वीडियो हम लोगों को मिला . जिसे संपादित कर हिंदी का वॉइस ओवर डालकर यूट्यूब चैनल विमर्श न्यूज़ चैनल पर डाला गया था. यूट्यूब चैनल का संचालन कुमार आकाश करता है और उसने इस वीडियो को चुन करके और तरुण तथा एंजेला के साथ बातचीत करके एक वीडियो क्लिप बनायाथा.
तरुण भारती का इतना ही संबंध विमर्श न्यूज़ के साथ याद आता है.
तरुण की पत्नी एंजेला उस समय मणिपुर मसले पर , शिलांग के एक चौराहे पर प्रोटेस्ट को लीड कर रही थी और तरुण वहां बने हुए थे.
तरुण ने नॉर्थ ईस्ट के राज्यों के पहचान के मसलों, उनकी अलग पहचानो , उनके प्रोटेस्ट के साथ लगातार अपने को बनाए रखा था.
पटना से संचालित हो रहे एक व्हाट्सएप ग्रुप डायनॉमिक्स ऑफ़ डेमोक्रेसी में भी तरुण टिप्पणियां किया करते थे.
भारत में राष्ट्र निर्माण के नेतृत्वकारी प्रहरियों में तरुण भारती को याद रखना होगा.
राइट नाम के एक पोर्टल पर वह राष्ट्र निर्माण के बकाया मसलों पर लिखी जा रही उत्कृष्ट रचनाओं को संपादित करके डालता था.
तरुण ने नॉर्थ ईस्ट की कुछ भाषाओं की कविताओं का अनुवाद किया था और एक सेट उसने तब मुझे भी दिया था जब मैं जन्म मुक्ति नाम की पत्रिका का संपादन करता था.
तरुण भारतीय एक आरंभिक टिप्पणी इस ग्रुप की शुरुआत के साथ आपके लिए लिख रहा हूं.
तरुण से मिल नहीं सकते. तरुण को याद रख सकते हैं.
तरुण से हम लोग भूल कर भी अब कभी मिल नहीं पाएंगे.
याद में लगातार बने रहने वाला यह शख्सियत वास्तव में फिर कदाचित भी हम लोगों से मिल नहीं पाएगा.
महेंद्र नारायण कर्ण की अपनी निजी लाइब्रेरी की किताबें कहां कौन संभालेगा. महेंद्र भाई की पत्नी उर्मिला दी, (तरुण की मां) बताती रही कि तरुण किताबों की शार्टिंग कर लेगा, तब यह तय करेंगे की कौन लाइब्रेरी ise लेने के लिए तैयार है और कहां दिया जाए.
तरुण की खुद की लाइब्रेरी हम सब जाने पहचाने मित्रों में बड़ी और विविध है.
दो दशक पहले कि तरुण की लाइब्रेरी का जिक्र रवीश कुमार ने भी आज के अपने प्रोग्राम में किया है.
एंजेला के ऊपर स्मृति शेष तरुण, उसकी स्मृतियां , उसकी लाइब्रेरी, बेटी और बाद के दो जुड़वा बेटों को संभालने की जिम्मेदारी आएगी.
एक नॉन बिलीवर के रूप में , ईश्वर में विश्वास नहीं रखने वालों में , हमारे सामने जो प्रश्न गहरा बना रहता है, , … मृत्यु के बाद क्या? …. फिर एक बार तरुण भारतीय यह प्रश्न और यह रहस्य छोड़कर हम लोगों के बीच से विदा हो गए.
हमारे एकदम आदरणीय , बहुत प्रिय, युवा साथी –तरुण भारतीय ….
स्मृति शेष को श्रद्धा सुमन.
लेखक – सी ए प्रियदर्शी, जानेमाने पत्रकार और समाजसेवी