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WhatsApp से छुट्टी लेने की मनमानी Teachers को पड़ेगा भारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने जारी किया आदेश

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बिहार में अब वॉट्सऐप (WhatsApp) के माध्यम से छुट्टी लेने की मनमानी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। बिना अनुमति अवकाश पर जाने वाले शिक्षकों (Teachers) के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। भागलपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी, राज कुमार शर्मा, ने इस संबंध में सख्त आदेश जारी किया है।

जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि आकस्मिक अवकाश के लिए केवल वॉट्सऐप संदेश या मौखिक सूचना को मान्यता नहीं दी जाएगी। सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों को सक्षम प्राधिकारी से विधिवत अनुमति प्राप्त करनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता के रूप में देखा

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने हाल ही में कुछ चिंताजनक मामलों की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने बताया कि कई कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के अपने कार्यालयों से अनुपस्थित हो जाते हैं। कुछ लोग केवल वॉट्सऐप पर संदेश भेजकर छुट्टी माने लेते हैं। विभाग ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता के रूप में देखा है।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार की लापरवाही सरकारी कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है और छात्रों से संबंधित गतिविधियों में रुकावट आ रही है। इसे किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाएगा। केवल विशेष परिस्थितियों में ही बिना अनुमति का अवकाश स्वीकार किया जाएगा।

राज कुमार शर्मा ने चेतावनी दी है कि जो भी पदाधिकारी या कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ वेतन रोकना और अनुशासनात्मक दंड भी शामिल हो सकते हैं।

आकस्मिक अवकाश के लिए एक निश्चित फॉर्मेट

आकस्मिक अवकाश के लिए विभाग ने एक निश्चित फॉर्मेट भी प्रस्तुत किया है। इस फॉर्मेट के अनुसार, शिक्षकों को आवेदन करना अनिवार्य होगा। इस आवेदन में कर्मचारी का नाम, पदनाम और शाखा का नाम शामिल करना होगा। इसके अलावा, उन्हें कुल स्वीकृत आकस्मिक अवकाश की संख्या और पहले ली गई छुट्टियों की जानकारी भी प्रदान करनी होगी।

उदाहरण के लिए, अवकाश की अवधि, छुट्टी का कारण तथा शेष अवकाश की स्थिति के बारे में भी जानकारी देना आवश्यक होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल डिजिटल संदेश या अनौपचारिक सूचनाओं की मदद से छुट्टी स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी को निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक है। इस आदेश के जारी होने के बाद शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में हलचल मची हुई है। विभाग का कहना है कि यह कदम कार्यस्थल की संस्कृति को सुधारने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे कार्यालयों में अनुशासन बना रहेगा और कामकाज की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

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