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MLA Anant Singh बरी, अदालत में कोई भी ठोस साक्ष्य सामने नही आया
बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से जाने जाने वाले जेडीयू विधायक अनंत सिंह (MLA Anant Singh) को कानूनी मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पटना की विशेष MP-MLA अदालत ने 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया, जो कि एक दशक से भी ज्यादा पुराना है। विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार मालवीय ने यह निर्णय सुनाया। अभियोजन पक्ष विधायक के खिलाफ अदालत में कोई भी ठोस साक्ष्य या गवाही पेश करने में असफल रहा। इस निर्णय के बाद अनंत सिंह के समर्थकों में उत्सव का माहौल है, जो इसे सत्य की विजय मान रहे हैं।
यह पूरा विवाद साल 2014 से शुरू होता है, जब पटना के श्री कृष्णापुरी थाना क्षेत्र में राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के अनुसार, विधायक के करीबी सहयोगी बंटू सिंह समेत चार लोग उनके घर में घुस आए थे और धमकी दी थी कि ‘अनंत सिंह को 10 करोड़ रुपये पहुंचा दो’। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने विधायक अनंत सिंह और बंटू सिंह के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी, जिसके बाद से पिछले 11 वर्षों से कानूनी कार्रवाई जारी है।
गवाहों की अनुपस्थिति और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की कमी
विशेष कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष का मामला काफी कमजोर साबित हुआ। विधायक के वकील सुनील कुमार ने बताया कि मामले में अनुसंधानकर्ता (IO) के अलावा कोई अन्य गवाह अदालत में अपने साक्ष्य देने नहीं आया। गवाहों की अनुपस्थिति और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की कमी के कारण अदालत ने यह निर्णय लिया कि अनंत सिंह के खिलाफ आरोप सीधे तौर पर सिद्ध नहीं होते। इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें और बंटू सिंह को साक्ष्य की कमी के कारण रिहा करने का आदेश दिया।
जैसे ही यह फैसला सुनाया गया, कोर्ट परिसर के बाहर उपस्थित समर्थकों ने खुशी का इज़हार किया। 11 साल पुराने इस आपराधिक मामले से मुक्ति पाना अनंत सिंह के राजनीतिक भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे विधायक के लिए यह निर्णय एक बड़ी राहत साबित हुआ है, क्योंकि इसने उन पर लगे गंभीर आपराधिक आरोप को समाप्त कर दिया है।
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