Sen your news articles to publish at [email protected]
NEET कांड में सिस्टम की पोल खुली: हॉस्टल मौत पर सम्राट चौधरी का रिएक्शन, SIT अलर्ट!
नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मृत्यु अब महज एक केस फ़ाइल बनकर नहीं रह गई है; यह इंसाफ़, ज़िम्मेदारी और जवाबदेही का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। राजधानी की हवा में उभरती इंसाफ़ की पुकार ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से लेकर राजनीतिक क्षेत्रों में हलचल पैदा कर दी है। शनिवार को जब मृतका के परिजन डीजीपी विनय कुमार से मिले, तो यह स्पष्ट हो गया कि स्थानीय जांच पर लोगों का विश्वास पूरी तरह से क्षीण हो चुका है।
करीब आधे घंटे तक चली वार्ता में मृतका के पिता ने डीजीपी को एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने एसआईटी जांच के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए और निष्पक्ष, त्वरित तथा गहन जांच की मांग की। पिता की बातों और विवरणों को गंभीरता से सुनने के बाद, डीजीपी ने तत्क्षण पटना के आईजी से संपर्क किया। इसके पश्चात, प्रशासन सक्रिय हो गया।
डीजीपी ने जांच में हुई लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की
आईजी से बातचीत के बाद, डीजीपी ने एसएसपी पटना, एसआईटी प्रमुख और सचिवालय वन के एसडीपीओ सहित कई अधिकारियों को बुलाया। तीन घंटे से अधिक समय तक चली समीक्षा बैठक में मामले के हर पहलू की विस्तार से जांच की गई। इस दौरान, डीजीपी ने जांच में हुई लापरवाही, देरी और भ्रमित करने वाले तत्वों पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कई सख्त निर्देश दिए।
इस समीक्षा का परिणाम यह रहा कि चित्रगुप्त नगर थाना की महिला पुलिस अधिकारी रश्मि कुमारी और कदमकुआं थाने के अपर थानाध्यक्ष हिमांशु झा को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई एसएसपी पटना ने डीजीपी के निर्देश पर की है। महत्वपूर्ण बात यह है कि निलंबन का आदेश मध्य रात्रि में ही जारी किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मामला गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है।
गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने समीक्षा बैठक का आयोजन किया
इस बीच, गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने भी मामले की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने उच्च स्तर की समीक्षा बैठक का आयोजन किया, जिसमें लगभग एक घंटे तक डीजीपी, एडीजी सीआईडी, आईजी पटना, एसएसपी पटना, एसआईटी प्रमुख और एसआईटी में शामिल तीन इंस्पेक्टर गृह मंत्री के समक्ष उपस्थित रहे।
गृह मंत्री ने समीक्षा के दौरान जांच में तेजी लाने, साक्ष्यों को मजबूत करने और दोषियों के विरुद्ध शीघ्र सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। स्पष्ट संदेश है—यह मामला केवल पुलिस द्वारा सुलझाने वाला नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकार की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है।
अब यह देखना होगा कि क्या प्रशासनिक कठोरता सचाई तक पहुँचने में सफल होगी, या यह मामला भी फाइलों के ढेर में दब जाएगा। राजधानी पटना की नजरें अब आगामी दिनों की तफ्तीश पर टिकी हुई हैं, जहां हर कदम पर न्याय की कसौटी परखनी होगी।
इसे भी पढ़ें – काम की Legal guarantee तय, राज्य सरकार को 125 दिन बाद unemployment allowance देना बाध्य
