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शॉकिंग! NEET छात्रा की मौत का राज़: परिजन ने SIT जांच पर ठोंके 8 सवाल, DGP क्या कहेंगे?
राजधानी पटना की हवा में एक बार फिर इंसाफ की मांग की गूंज सुनाई दे रही है। नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक प्रतिभाशाली छात्रा की संदिग्ध मृत्यु का मामला केवल एक दुर्घटना नहीं रह गया है, बल्कि इसमें गंभीरता, लापरवाही और साजिश की बू साफ़ महसूस हो रही है। जिस छात्रावास में उम्मीदों को उड़ान भरनी थी, वहां अब प्रश्न, संदेह और व्यवस्था की कमियों का घेराव है।
नीट की एक छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में मृतका के परिवार के सदस्य शनिवार को सीधे डीजीपी विनय कुमार से मिले। इस मुलाकात के दौरान, उन्होंने एसआईटी जांच को लेकर आठ खास बिंदुओं पर गंभीर आपत्ति जताई और निष्पक्ष व गहन जांच की मांग की। लगभग आधे घंटे तक चली इस बातचीत में, मृतका के पिता ने डीजीपी को एक लिखित आवेदन दिया, जिसमें उन्होंने जांच के लिए आठ महत्वपूर्ण बिंदुओं को उठाया।
सीसीटीवी फुटेज की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग
परिजनों की प्राथमिक मांग यह है कि 5 जनवरी की शाम 5 बजे से 6 जनवरी तक के सभी सीसीटीवी फुटेज की FSL जांच करवाई जाए। इसके अलावा, छात्रावास और मेस पंजी के अनुसार उस समय हॉस्टल में उपस्थित सभी छात्राओं की जानकारी, उनके बयान और मोबाइल कॉल डिटेल्स की जांच की जाए। इस प्रक्रिया के साथ-साथ इन दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां परिवार को प्रदान की जाएं।
दूसरे बिंदु में, छात्रावास के मालिक मनीष रंजन के पिछले दरवाजे, निकटवर्ती गलियों और सड़कों के सीसीटीवी फुटेज की फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) जांच कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही, मनीष रंजन और उनके बेटे के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की भी जांच का अनुरोध किया गया है। तीसरे बिंदु में छात्रावास संचालिका नीलम अग्रवाल, उनके पति श्रवण अग्रवाल, और उनके बेटे आशु अग्रवाल के मोबाइल रिकॉर्ड की जांच करने की मांग की गई है।
डॉक्टर की भूमिका पर सवाल
परिजनों ने प्रभात हॉस्पिटल से संबंधित डॉक्टरों, डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. अभिषेक और महिला डॉक्टर जया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच की मांग की है। साथ ही, चित्रगुप्त नगर थाना की प्रभारी रोशनी कुमारी की कार्यशैली को संदिग्ध बताते हुए उनकी भी भूमिका की जांच कराने की मांग की गई है।
एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें अस्पताल के एक नर्सिंग स्टाफ पर आरोप लगाया गया है। नर्स ने भर्ती के समय छात्रा की मां से कहा कि “लड़की के साथ बहुत गलत हुआ है।” परिवार के लोग इस नर्स की पहचान करके उसका बयान लेने, साथ ही सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
इलाज के दौरान बार-बार बदले गए मेडिकल थ्योरी
इसके अलावा, परिजनों ने सवाल उठाया है कि छात्रा द्वारा पहने गए कपड़ों को उन्हें क्यों नहीं सौंपा गया, और इलाज के दौरान बार-बार बदले गए मेडिकल थ्योरी पर भी संदेह व्यक्त किया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सभी जांच रिपोर्ट उपलब्ध थीं, तो नींद की दवा से होने वाली मौत की कहानी किस आधार पर बनाई गई?
अब सभी की नजरें डीजीपी और एसआईटी की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। सवाल यह है कि आगे की जांच किस दिशा में जाएगी?
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