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Bihar Property Registration Rules 2026: 10 लाख से महंगी जमीन पर PAN जरूरी क्यों?

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Bihar Property Registration Rules 2026: बिहार में अब 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य वाले जमीन या मकान की रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड का होना अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में बिहार सरकार के मद्य निषेध, उत्पाद और निबंधन विभाग ने सभी जिला अवर निबंधकों और निबंधन कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णय आयकर विभाग से प्राप्त पत्र के आधार पर लिया गया है, जिसका उद्देश्य बड़े लेन-देन में पारदर्शिता स्थापित करना तथा टैक्स चोरी के मामलों को रोकना है।

हाल के सर्वेक्षण और निरीक्षणों में यह पाया गया कि बिहार के कई निबंधन कार्यालयों में 10 से 30 लाख रुपये तक की रजिस्ट्री में ऐसे मामले मौजूद थे, जिनमें पैन कार्ड की अनुपस्थिति देखी गई।

10 लाख रुपये या उससे अधिक की रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड होना अनिवार्य

इस संदर्भ में, सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि 10 लाख रुपये या उससे अधिक की रजिस्ट्री के लिए पैन कार्ड होना अनिवार्य है। सभी रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रारों को आयकर अधिनियम की धारा 139A और उससे संबंधित नियमों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया गया है।

नए नियमों के अनुसार, यदि किसी पक्षकार (कंपनी या फर्म को छोड़कर) के पास पैन कार्ड नहीं है, तो उन्हें आयकर नियमों के तहत फॉर्म-60 में एक घोषणा पत्र जमा करना होगा। निबंधन कार्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी बड़े लेन-देन में पैन का विवरण दर्ज हो या फिर फॉर्म-60 प्राप्त किया गया हो। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को पैन कार्ड की विश्वसनीयता को भी ध्यान में रखना होगा।

बिहार के निबंधन कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर आलोचना

आयकर विभाग के अपर निदेशक, रूपेश अग्रवाल, ने इंस्पेक्टर जनरल को भेजे गए अपने पत्र में बिहार के निबंधन कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर आलोचना की है। जांच में यह सामने आया है कि बिहार के 137 अवर निबंधक कार्यालयों में से 83 ने अभी तक फॉर्म-61 भरने के लिए आवश्यक पंजीकरण नहीं कराया है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिन 54 कार्यालयों ने रजिस्ट्रेशन किया है, उन्होंने भी 10 लाख रुपये से अधिक के बड़े लेन-देन के बावजूद फॉर्म-61 के माध्यम से कोई जानकारी नहीं दी है।

आयकर नियमों के अनुसार, जिन लेन-देन में पैन नहीं होता है, उनकी जानकारी साल में दो बार आयकर विभाग को फॉर्म-61 के माध्यम से प्रस्तुत करनी होती है। पहले दरजे में, अप्रैल से सितंबर तक के लेन-देन की जानकारी 31 अक्टूबर तक देनी होती है। वहीं, अक्टूबर से मार्च तक के लेन-देन के लिए आखिरी तारीख 30 अप्रैल है।

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