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Loksabha Speaker Om Birala के खिलाफ अविश्वास! हटाने का पूरा प्रोसेस और जरूरी वोट

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लोकसभा के स्पीकर (Loksabha Speaker) ओम बिरला (Om Birala) के खिलाफ विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक, अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। उनके ऊपर आरोप लगाया जा रहा है कि वे पक्षपाती व्यवहार कर रहे हैं। बजट सत्र के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद हुए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी, जो विपक्ष के नेता हैं, को बोलने का अवसर नहीं दिया गया।

स्पीकर ने कांग्रेस के सात सांसदों समेत कुल आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही, भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने और कांग्रेस की महिला सांसदों पर आरोप लगाने का भी आरोप लगाया जा रहा है।

इंडिया ब्लॉक की एक बैठक आयोजित

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में इंडिया ब्लॉक की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में स्पीकर के खिलाफ एक प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विपक्ष संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत यह प्रस्ताव पेश करने की योजना बना रहा है। ‘द हिन्दू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्ष जल्द ही नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह कार्रवाई सदन में स्पीकर की निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठाने और एक राजनीतिक संदेश देने का प्रयास है।

लोकसभा के स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया

  • लोकसभा के स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा के नियमों (जैसे रूल 200) के अधीन निर्धारित की गई है। इसे ‘अविश्वास प्रस्ताव’ के बजाय ‘स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव’ (resolution for removal of Speaker) के रूप में जाना जाता है।
  • इस प्रस्ताव का लिखित सूचनापत्र लोकसभा महासचिव को कम से कम 14 दिन पहले देना आवश्यक है।
  • नोटिस पर कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। 50 सदस्यों का समर्थन बिना प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
  • जब नोटिस स्वीकार किया जाता है, तो स्पीकर चर्चा के लिए एक निश्चित दिन निर्धारित करते हैं, जो कि 10 दिन से अधिक नहीं हो सकते।
  • चर्चा के दौरान स्पीकर स्वयं कुर्सी पर नहीं बैठते; इसका कार्यभार डिप्टी स्पीकर संभालते हैं।
  • मतदान में साधारण बहुमत आवश्यक होता है।

इतिहास में किसी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव कभी सफल नहीं हुआ

लोकसभा के इतिहास में किसी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव कभी सफल नहीं हुआ है। अब तक तीन ऐसे प्रस्ताव आए हैं, लेकिन सभी असफल रहे हैं। वर्तमान लोकसभा में NDA के पास एक मजबूत बहुमत है, जिसका मतलब है कि प्रस्ताव के सफल होने की संभावना बहुत कम है। फिर भी, विपक्ष इसे स्पीकर की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाने और सदन की कार्यवाही में बदलाव की मांग के लिए एक अवसर के रूप में देख रहा है। यदि विपक्ष 50 से अधिक सांसदों का समर्थन प्राप्त करने में सक्षम हो जाता है, तो प्रस्ताव सदन में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे बजट सत्र में राजनीतिक हलचल और भी बढ़ सकती है।

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