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‘गैंग ऑफ वासेपुर’ ने डाला आरबीआई में डाका
इन दिनों ‘गैंग ऑफ वासेपुर’ ने डाला आरबीआई में डाका: सुबह जगा तो रात का आँधी थम चुकी थी। बिजली कटी हुई थी। कॉरीडोर में रखी कुर्सी तेज हवा के कारण उलट गई थी। उलटी कुर्सी को देखकर अंदाज़ा हुआ कि रात की आँधी सामान्य नहीं थी।
टूटी हुई डाली और फिर उखड़े हुए पेड़
मैं और अलका सुबह टहलने बहादुरपुर तालाब के पास जाते हैं। डेढ़-दो किलोमीटर तालाब की दूरी होगी। रास्ते में नये और पुराने दोनों बगीचे पड़ते हैं। आज टहलने निकला तो पश्चिम का आसमान काले-काले बादलों से लद गया। ठंड भरी तेज हवा। बगीचे के पास पहुँचा तो पहले टूटी हुई डाली दिखी और फिर उखड़े हुए पेड़।
बीसों आम के पेड़ या तो जड़ से उखड़ गये थे या उनकी डालियाँ टूट कर बिखर गई थीं। आगे बढ़े तो कटहल के कम से कम पाँच पेड़ों की डालियाँ भी टूटी पड़ी थीं। और बगीचे में हज़ारों आम यों ही पड़े थे—ज़्यादातर फटे हुए। सुबह-सुबह आसपास के लोग आकर जितने आम ले जा सकते थे, ले गए थे। शेष यों ही फूली हुई धरती, पत्तों और कीचड़ के बीच पड़े थे।
देश झूठ और फ़रेब की बारिश में भींग रहा
बम्बइया आम पकने लगे थे। दस-बारह दिनों में मालदह भी पकते, लेकिन आँधी ने सबकुछ तबाह कर दिया। तब तक पश्चिम से तेज़ हवा पुनः आयी और साथ में बरसा लेकर आयी। आम के पेड़ों के नीचे मैं खड़ा हो गया। बारिश की बूँदें गिरती रहीं और पूरी प्रकृति भीगती रही।
देश भी झूठ और फ़रेब की बारिश में भींग रहा है। अहमदाबाद में बैंक ऑफ बड़ौदा की कालूपुर शाखा में बने आरबीआई के करेंसी ख़ज़ाने से 8 करोड़ 70 लाख रुपए की चोरी हो गई। अगर कांग्रेस का राज रहता तो ‘गैंग ऑफ वासेपुर’ चतुर्दिक हंगामा करता, तालियाँ पीटता, मुँह चमकाता और शोर मचाता।
आरबीआई से ही करोड़ों रुपए लूटे जा रहे
कहाँ हो राष्ट्रभक्तो? आरबीआई से ही करोड़ों रुपए लूटे जा रहे हैं। इसके पूर्व माल्या टाइप के कितने लुटेरे बैंक के अरबों रुपए लूट कर विदेशों में बस गये। बाबा रामदेव, रविशंकर, देवकीनंदन ठाकुर, अनिरूद्धाचार्य, धीरेंद्र शास्त्री और रामभद्राचार्य के मुँह में क्या ताला लगा है? संबित पात्रा, चित्रा त्रिपाठी, अशोक आलोक के मुँह में लकवा मार गया है? और चौकीदार किसकी चौकीदारी कर रहा है?
देश का दुर्भाग्य है कि ऐसे लोग शासन में हैं, जिन्हें अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। क्या-क्या न कहा था! देश को विश्व गुरु बनायेंगे। और देश के हाथों उन्होंने कटोरा थमा दिया है।
आम आदमी लाइन में खड़ा है
पिछले कई दिनों से पेट्रोल-डीज़ल उछालें मार रहा है। आम आदमी लाइन में खड़ा है, उसकी जेबों पर ठनका गिरा है और विपदकाल में भी चौकीदार के दोस्तों की आमदनी बढ़ रही है। डॉक्टरों के अच्छे दिन बढ़ती मरीज़ों की बीमारियों पर निर्भर हैं और पूँजीपतियों के अच्छे दिन देश की बुरी हालत पर।
जनता तबाह हो जाती है और व्यापारी मालामाल हो जाते हैं। कोरोना काल में भी अड़ानी के हर दिन करोड़ों-करोड़ की आमदनी हुई। गिद्धों के अच्छे दिन तब आते हैं, जब लोग छटपटाकर मरते हैं। मृत्यु उनके लिए स्वर्गिक सुख लेकर आती है।
सत्ताधारी अपने गुमान और अहंकार में टेढ़ा बतियाते रहे तो कॉकरोच उसे चाट जाएगा
जनता के अच्छे दिन तो तब आयेंगे, जब सभी पूँजीपतियों की संपत्ति को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जायेगा। आमदनी और क़ीमत पर लगाम लगाई जायेगी। संसद को भ्रष्टाचारियों और अपराधियों से मुक्त किया जायेगा। सबके लिए समान शिक्षा और चिकित्सा होगी। बाज़ार पर से उपभोक्तावाद की काली छाया दूर हो जाएगी। धर्म और जाति के नाम पर छल-कपट नहीं होगा। इंसान को इंसान की हैसियत से देखा जाएगा, न कि जाति-श्रेष्ठता और धर्म-श्रेष्ठता के कारण। धरती, जंगल और पानी को पूँजीपतियों के लोभ का शिकार नहीं होने दिया जाएगा।
अगर सत्ताधारी अपने गुमान और अहंकार में टेढ़ा बतियाते रहे तो कॉकरोच उसे चाट जाएगा।
