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Gaya School Children SDM Protest: सरकारी स्कूल में पंखा-पानी नहीं, बच्चों ने SDM ऑफिस पहुंचकर सुनाई अपनी परेशानी

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Gaya School Children SDM Protest: टिकारी अनुमंडल के सिमुआरा मिडिल स्कूल में छात्रों की बदहाल स्थिति के प्रति गुस्सा आखिरकार प्रशासन तक पहुँच गया।

छोटे बच्चों ने इस समस्या के खिलाफ आवाज उठाते हुए आंदोलन का सहारा लिया। स्कूल में महीनों से चल रही बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण परेशान होकर, 40 से अधिक छात्र-छात्राएं मंगलवार को सीधे टिकारी अनुमंडल कार्यालय पहुँच गए।

इन बच्चों ने अपने हाथों में आवेदन लेकर सिर्फ अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने नहीं रखीं, बल्कि स्कूल की अव्यवस्थाओं के खिलाफ भी नारेबाजी की।

छात्रों की अचानक बड़ी संख्या में अनुमंडल कार्यालय पहुँचने से थोड़ी देर के लिए वहाँ हलचल मच गई। उस समय एसडीएम प्रवीण कुंदन किसी सरकारी कार्य से बाहर थे।

कई महीनों से अधिकतर पंखे चापाकल काम नही कर रहे

छात्रों की समस्याओं को सुनने के लिए कार्यपालक दंडाधिकारी रंजीत कुमार सिंह को भेजा गया, लेकिन बच्चे एसडीएम से सीधे मिलने की इच्छा पर अड़े रहे। गुरारू से लौटकर, एसडीएम ने स्वयं छात्रों के साथ बातचीत की।

छात्रों ने प्रशासन को सूचित किया कि विद्यालय में कई महीनों से अधिकतर पंखे काम नहीं कर रहे हैं, और पेयजल के लिए बनाए गए चापाकल ठीक से कार्य नहीं कर रहा।

उनका यह भी कहना था कि मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है, कई बेंच-डेस्क टूट चुके हैं, और कक्षाओं में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बच्चों ने बताया कि वे इन समस्याओं की शिकायत पहले भी कई बार कर चुके हैं, लेकिन इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

इस मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए, एसडीएम ने तुरंत एक जांच समिति गठित की और चार दिनों के भीतर समस्याओं की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण

इस बीच, बच्चों की शिकायत जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर तक पहुंच गई है। डीएम के निर्देश पर, बुधवार को प्रारंभिक शिक्षा और समग्र शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) नित्यम कुमार गौरव और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) अभय कुमार रमण ने विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान, अधिकारियों ने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, सफाई, मध्याह्न भोजन, पेयजल, शौचालय, बिजली, कक्षा संचालन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का मूल्यांकन किया।

जांच में कई कमियों का पता चलने पर प्रधानाध्यापक को सात दिनों के भीतर सभी समस्याओं को ठीक करने का आदेश दिया गया।

निरीक्षण टीम ने छात्रों से सीधे बातचीत की और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी इकट्ठा की। बच्चों से पठन-पाठन, मध्याह्न भोजन, पेयजल, शौचालय, बिजली और कक्षा संचालन से संबंधित सवाल पूछे गए।

अधिकारियों ने विभिन्न कक्षाओं का निरीक्षण कर शिक्षण व्यवस्था का मूल्यांकन किया। उन्होंने विद्यालय के अभिलेखों, उपस्थिति रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की भी जांच की।

सात दिन का सुधार आदेश

जांच के निष्कर्षों के बाद, अधिकारियों ने प्रधानाध्यापक को निर्देशित किया कि वे सात दिनों के भीतर सभी कक्षाओं और शौचालयों की सफाई सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, आवश्यक मरम्मत कार्य को पूरा करने और मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता में सुधार करने की बात कही गई।

अधिकारियों ने यह भी निर्दिष्ट किया कि सभी कक्षाओं में सुरक्षित विद्युत वायरिंग का होना चाहिए, खराब पंखों की मरम्मत करना या नए पंखों की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा, निर्धारित समय सारणी के अनुसार नियमित कक्षाएं संचालित करना और सभी शिक्षकों को प्रतिदिन पाठ्य-टीका तैयार कर उसकी देखरेख करने का निर्देश दिया गया।

डीपीओ नित्यम कुमार गौरव ने स्पष्टता से बताया कि स्कूलों में गुणवत्ता वाली शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले सात दिनों में अपेक्षित सुधार नहीं होते हैं, तो संबंधित प्रधानाध्यापक, अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने आगे कहा कि बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग की प्राथमिकता है, और इस उद्देश्य के लिए स्कूलों का नियमित रूप से औचक निरीक्षण किया जा रहा है।

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