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Jharkhand JPSC Scam: 5 लाख में प्रीलिम्स, 70 लाख में फाइनल! CID पूछताछ में अभय तिवारी का बड़ा खुलासा
Jharkhand JPSC Scam: जेपीएससी मेधा घोटाले की जांच कर रही सीआईडी ने परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी, मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के मार्केटिंग प्रमुख अभय कुमार तिवारी, जिसे मनोज कुमार तिवारी के नाम से भी जाना जाता है, से रिमांड के दौरान गहन पूछताछ की है।
पूछताछ के दौरान, तिवारी ने जेपीएससी की परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और वसूली के एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया।
उनके बयान में, जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सेवानिवृत्त एल. खियांग्ते के अलावा, इस सिंडिकेट में जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा, डॉ. जमाल अहमद, पतंजलि कोचिंग के रवि कुमार तथा टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के बीच साठगांठ का जिक्र किया गया है। अभय तिवारी ने खुलासा किया है कि एक सिंडिकेट ने 11वीं और 13वीं जेपीएससी साक्षात्कार में लाभ दिलाने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार से 15 लाख रुपये की वसूली की थी।
उन्हें बताना है कि उन्होंने आदित्य पांडेय नामक एक कोचिंग संचालक के संपर्क में आकर उम्मीदवारों को सहायता प्रदान की।
आदित्य पांडेय ने बताया कि पूर्व जेपीसी सदस्य अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम ने सिंडिकेट के सभी अधिकारियों और सदस्यों की मदद से सात प्रतिभागियों के साक्षात्कार में अंक बढ़ाने का काम किया, जिसके लिए प्रति उम्मीदवार 15 लाख रुपये की मांग की गई।
अभय तिवारी ने पूछताछ में कहा है कि जिन अभ्यर्थियों को सिंडिकेट के माध्यम से अंक बढ़ाकर सफल बनाया गया, उनमें तीन डीएसपी, एक उप कारापाल और अन्य विभिन्न उम्मीदवार शामिल हैं।
कौन कौन शामिल थें
सफल अभ्यर्थियों में डीएसपी रोबिन कुमार, डीएसपी रोबिन सिन्हा, उप कारापाल राजेश कुमार रजक, डीएसपी मनीष कुमार और गौतम कुमार आदि के नाम शामिल हैं। सिन्हा व उप कारापाल राजेश कुमार रजक को पास कराने के लिए कोडरमा के एजेंट लालू यादव ने अभय तिवारी से संपर्क किया था। इसके बाद अभय तिवारी ने तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते और सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के माध्यम से बोर्ड में मदद की। एक अभ्यर्थी, डीएसपी मनीष कुमार, का संपर्क डॉ. अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम ने किया, जबकि दूसरे अभ्यर्थी गौतम कुमार का संपर्क पतंजली कोचिंग के संचालक रवि कुमार ने सिंडिकेट से कराया। अभय तिवारी के अनुसार, इस सिंडिकेट में अन्य एजेंट भी सक्रिय थे।
उनके अनुसार, परीक्षा पास कराने की दर विभिन्न स्तरों पर निर्धारित की गई थी। 11वीं और 13वीं जेपीएससी परीक्षा के दौरान प्रारंभिक परीक्षा से लेकर अंतिम परीक्षा तक विभाजित दरें तय की गई थीं। प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए पांच लाख रुपये और एससी-एसटी के लिए दो से तीन लाख रुपये निर्धारित थे। इसके विपरीत, अंतिम परीक्षा में सफल होने के लिए प्रति अभ्यर्थी की दर 60 से 70 लाख रुपये तक पहुँच जाती थी।
साक्षात्कार के लिए राशि जुटाने का कार्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के पीए मोरहाबादी निवासी ब्रजराम द्वारा किया जाता था। वसूलता था। जेपीएससी अध्यक्ष एल. खियांग्ते मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय के कंप्यूटर आपरेटर धर्मेंद्र के माध्यम से पैसे वसूलते थे। जेपीएससी सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने हजारीबाग में बिचौलिए अभ्यर्थियों से पैसे वसूली की थी। इस मामले की जानकारी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के पास थी। जेपीएससी के सभी अधिकारी साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के कोड को डी-कोड करने के लिए रामवीर सिंह पर ही निर्भर रहते थे।
रामवीर सिंह ने इस मुद्दे का जिक्र अभय तिवारी के साथ किया था। अधिकतर अभ्यर्थी जेपीएससी के सदस्यों के जरिए फीस तय करते थे और फिर साक्षात्कार के दौरान पूरी प्रक्रिया का पालन होता था।
सीडीपीओ परीक्षा पास कराने की फीस प्रति अभ्यर्थी दस लाख रुपये
अभय तिवारी ने सीआईडी को सूचित किया है कि सीडीपीओ परीक्षा पास कराने की फीस प्रति अभ्यर्थी दस लाख रुपये निर्धारित थी। इस प्रक्रिया में भी टीडीपीएल ने अभ्यर्थियों की व्यवस्था की थी, जिसमें सामान्य वर्ग से झारखंड के बाहर के अभ्यर्थी भी शामिल थे। एक उम्मीदवार रजक के साथ एल. खियांग्ते के सहायक धर्मेंद्र ने 15 लाख रुपये लिए, जबकि दूसरे प्रतिभागी काजल भारती के लिए डॉ. अजिता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रजराम ने 10 लाख रुपये की वसूली की। ब्रजराम भी पतंजली कोचिंग के संचालक रवि कुमार के संपर्क में था।
इसके अलावा, एक और उम्मीदवार प्रमोद कुमार पाठक का बीच में रहने वाला व्यक्ति आईटीआई के प्रोजेक्ट मैनेजर कृष्णा था। उसने कुमारी सोनी जायसवाल, विभूति कुमार, स्वाति कुमारी, अंकित कुमार जैसे कई व्यक्तियों को परीक्षा पास कराने के लिए सौदा किया।
टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने सीआईडी की पूछताछ के दौरान माना कि 11वीं और 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा और सीडीपीओ के साक्षात्कार के लिए टीडीपीएल अभ्यर्थियों के क्रमांक के आधार पर एक कोड बनाता था।
उसी कोड के आधार पर साक्षात्कार में धांधली होती थी। इसी कोड का उपयोग करके जेपीएससी बोर्ड के सदस्यों से कुछ अभ्यर्थियों को पास कराने का खेल खेला जाता था।
