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Mines and Minerals Amendment Bill 2026 लोकसभा से पास, राज्यों के कर अधिकारों पर रोक; झारखंड को भारी राजस्व नुकसान की आशंका

Mines and Minerals Amendment Bill 2026
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विशेष रिपोर्ट | मंथन, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता

रांची: लोकसभा में 12 अगस्त, 2026, बुधवार को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पास कर दिया गया। यह विधेयक 1957 के मूल खान और खनिज कानून में संशोधन करता है।

इसके तहत राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिज युक्त भूमि पर किसी भी प्रकार का नया कर, उपकर या शुल्क लगाने का निषेध करता है। संशोधन लागू होने से पहले राज्यों द्वारा घोषित कोई भी कर बकाया जो अभी तक वसूला नहीं गया है, उसे भी अवैध घोषित करता है।

इस संशोधन के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अनुसार ही खनिज की मात्रा, उसके मूल्य, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर ऐसी भूमि के संबंध में कोई कर या शुल्क लगाया जा सकेगा। अभी इसे राज्यसभा में पारित करना बाकी है।

झारखंड के राजस्व और बकाये पर पड़ेगा सीधा असर

झारखंड में 2024 में ‘झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस कानून’ बनाया गया था। इसके तहत खनिज-युक्त भूमि जिसमें कोयला-युक्त भूमि भी शामिल है, खनिज के प्रेषण के आधार पर उपकर की व्यवस्था की गई है।

केन्द्र के इस कानून संशोधन के बाद झारखंड का 8 से 10 हजार करोड़ रु. का सालाना राजस्व प्रभावित होने की संभावना है। 1.36 लाख करोड़ रु. बकाया की मांग पर भी असर पड़ेगा।

  • सालाना राजस्व का आंकड़ा: पिछले वित्तीय वर्ष में झारखंड सरकार को लगभग 8000 करोड़ रुपए केवल झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड से मिले थे। इस साल करीब 10000 करोड़ से भी अधिक राजस्व का अनुमान है।
  • 1.41 लाख करोड़ का बकाया दावा: झारखंड लंबे समय से केंद्र सरकार से 1.36 लाख (अब बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रु.) की मांग करता रहा है। इसमें एक लाख करोड़ की मांग केवल भूमि इस्तेमाल किए जाने का मुआवजा है। जिसमें 41,142 करोड़ रु. बकाया है और 60,000 करोड़ रु. ब्याज है। इस अधिनियम से इस पर भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड़ सकता है।

संघीय ढांचे और प्रांतीय अधिकारों पर सवाल

इस विधेयक के प्रावधानों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह संशोधन देश के फेडरल सिस्टम (संघीय ढांचे) पर हमला है। यह प्रांतों के राजस्व पर डाका डालने जैसा है और इसके जरिए पूंजीपतियों को खुली रियायत दी जा रही है।

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