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नाले की गैस से सूर्य विजय तक, मोदी के बयानों पर ‘अखिल’ कविराय का तीखा व्यंग्य

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अगर आप मनमोहन सिंह जी से पूछें कि लता मंगेशकर या किशोर कुमार ने किसी गाने में कौन सा सुर इस्तेमाल किया, तो वे कहेंगे कि मुझसे अर्थव्यवस्था के बारे में पूछें, संगीत के बारे में नहीं।

अगर आप अटल जी से पूछें कि तेंदुलकर को यॉर्कर बॉल या बाउन्सर से डर लगता है, तो वे कहेंगे कि मुझसे विदेश नीति या कविता के बारे में बात करें, क्रिकेट के बारे में नहीं।

अगर आप राजीव गांधी से पूछें कि एक एकड़ जमीन पर कितना गन्ना उगता है, तो वे कहेंगे कि मुझे खेती के बारे में नहीं पता, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बारे में पूछें।

अगर आप इंदिरा गांधी से पूछें कि ग़ालिब की किसी ग़ज़ल का क्या अर्थ है, तो वे कहेंगी कि मुझसे देश की सीमाओं के बारे में पूछें, शायरी के बारे में नहीं।

अगर आप लाल बहादुर शास्त्री जी से माइकल जैक्सन के नृत्य के बारे में पूछें, तो वे कहेंगे कि मुझसे खेत या सेना के बारे में पूछें।

अगर आप नेहरू जी से लाला अमरनाथ की बैटिंग के बारे में पूछें, तो वे खुद ही देश के विकास, इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स, आयुर्विज्ञान और मेडिकल इंस्टिट्यूट, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन, डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस रिसर्च अँड डेवेलपमेंट, शुगर मिल, कारख़ाने, स्कूल, विश्वविद्यालय, खेती, सेना आदि विषयों पर बात करते।

लेकिन देश ने आखिरकार ऐसे महानुभाव को देखा, जो बिना सवाल पूछे नाले की गैस से चाय बना देता है, बादलों में जहाज़ छिपा देता है ताकि रडार उसे न देख सके, छात्रों को वैश्विक गर्मी की सही परिभाषा सिखाता है, वैज्ञानिकों को पवन टरबाइन से पानी और ऑक्सीजन निकालना सिखाता है। क्रिकेट, फ़िल्म, साहित्य, विज्ञान, कला, संगीत, मोर, जंगल—उन सभी विषयों पर उसकी जानकारी अपार है। बिना ऑक्सीजन, बिना अस्पताल, बिना इलाज के कोरोनावायरस से ताली और थाली पैथी से लड़ना उन्होंने ही सिखाया। पूरी दुनिया मोदी की ताली थाली पैथी की मुराद हो गई।

अब वे वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष विज्ञान और चंद्रलोक के रहस्य समझा रहे हैं।

चंद्र विजय तो कर लिए हैं, उन्होंने कहा;

सूर्य विजय अब करें, जल्दी ही अभियान शुरू हो।

जल्दी हो अभियान, एक वैज्ञानिक ने पूछा;

हम वहाँ कैसे जाएँ? सूर्य तो आग का गोला है।

कहें ‘अखिल’ कविराय, साब ने तब कहा;

रात में उतरें, अब समझ आ गया।

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