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Xi Jinping India Visit: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 से 13 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आएंगे, यह जानकारी चीन ने गुरुवार को साझा की। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेना है।
यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले सात वर्षों में यह पहली बार है जब शी जिनपिंग भारत का दौरा करने जा रहे हैं। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक शनिवार शाम को आयोजित की जाएगी।
शी जिनपिंग की यात्रा को लेकर कल तक कई अनिश्चितताएँ बनी रहीं। अब नई जानकारी मिल रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चीन की ओर से यात्रा की घोषणा में थोड़ी देरी ने कुछ अटकलें पैदा की थीं।
यात्रा के बारे में आधिकारिक सूचना कई हफ्ते पहले
हालांकि, बीजिंग ने भारत को शी चिनफिंग की यात्रा के बारे में आधिकारिक सूचना कई हफ्ते पहले ही दे दी थी। चीन ने 27 अगस्त को बीजिंग में भारतीय दूतावास से राष्ट्रपति के प्रतिनिधिमंडल के लिए वीजा जारी करने का अनुरोध किया था।
सूत्रों के अनुसार, शी चिनफिंग के साथ 67 सदस्यों का एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ रहा है। इस टीम में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य तथा शी चिनफिंग के करीबी सहयोगी काई ची और विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल हैं।
इसके अलावा, एक अलग व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी यात्रा पर आ रहा है। राष्ट्रपति का यह दौरा केवल 24 घंटे का होगा। वे शनिवार को दोपहर 12:10 बजे पहुंचेंगे और अगले दिन ठीक 12:20 बजे वापस लौट जाएंगे।
दोपहर करीब 2 बजे शी जिनफिंग भारत मंडपम पहुंचेंगे
जानकारी के अनुसार, शनिवार को दोपहर करीब 2 बजे शी चिनफिंग भारत मंडपम पहुंचेंगे, जहां पीएम मोदी उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी।य बैठक ब्रिक्स के बंद सत्र और पीएम मोदी की तरफ से आयोजित रात्रिभोज जो कि शाम 7:30 बजे आयोजित होगा, उसमें शामिल होंगे।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब 2024 में कजान में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के पश्चात भारत और चीन के बीच संबंधों में सकारात्मक बदलाव आया है। कजान में हुई वार्ता के बाद पूर्वी लद्दाख में 2020 के सैन्य विवाद का समाधान किया गया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव में कमी आई।
इस अवसर पर, पीएम मोदी भारत की ओर से व्यापार संतुलन, निष्पक्ष बाजार तक पहुंच, और सप्लाई चेन की विश्वसनीयता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की संभावना है। यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और आगे बढ़ाने में सहायक साबित हो सकता है।
