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West Bengal Byelection: नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में TMC को झटका, चुनाव से पहले प्रत्याशी ने नाम लिया वापस

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West Bengal Byelection: विधानसभा उपचुनावों में नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी ममता बनर्जी की पार्टी, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, ने अपने प्रत्याशी का नामांकन वापस लेने का निर्णय लिया है।

रेजीनगर से तृणमूल के उम्मीदवार रबिउल आलम चौधरी ने शनिवार को यह घोषणा की। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का कोई प्रत्याशी मौजूद नहीं रहेगा।

रबिउल ने नामांकन वापस लेने का कारण बताया कि नया चुनाव चिह्न लोगों में पहचान बनाने में मुश्किलें पेश कर रहा है, और इस कदम का कार्यकर्ताओं पर भी काफी दबाव है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकर्ता चुनाव में भाग लेने के लिए इच्छुक नहीं हैं। इसके अलावा, उन्होंने इस मुद्दे पर ममता बनर्जी से भी चर्चा की।

इससे पहले, नंदीग्राम में ममता तृणमूल की प्रत्याशी संचिता प्रधान ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने सुझाव दिया था कि तृणमूल कांग्रेस कांग्रेस को समर्थन देने पर विचार कर रही है।

शनिवार को नामांकन वापसी की अंतिम तारीख

रेजीनगर को लेकर ममता बनर्जी ने कहा था कि इस मामले पर निर्णय बाद में लिया जाएगा। ही रबिउल के नामांकन वापस लेने की अटकलें लग रही थीं। शनिवार को नामांकन वापसी की अंतिम तारीख पर उन्होंने यह फैसला कर लिया।

निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके ‘घासफूल’ चिह्न को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, ममता ने पार्टी का नया नाम ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और नया चिह्न ‘फुटबॉलर’ अपनाया है।

नए प्रतीक के साथ चुनावी प्रक्रिया में समस्या का सामना करते हुए, ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों ने दोनों सीटों पर अपने नामांकन वापस ले लिए हैं। इससे अब इन उपचुनावों में ममता तृणमूल का कोई उम्मीदवार नहीं रह जाएगा।

इस बीच, रेजीनगर में आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के बेटे गोलाम नबी आजाद रबिन को भी प्रतीक के मामले में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।

वह अपने पिता द्वारा उपयोग में लाए गए पुराने ‘बांसुरी’ प्रतीक के साथ चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपचुनावों के लिए किसी प्रतीक को पूर्व में आरक्षित नहीं किया जा सकता।

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