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हिंसक लोगों की अहिंसा: डॉ. योगेंद्र ने RSS, BJP और सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल
हिंसक लोगों की अहिंसा
किसी ने कहा दिया कि मेरा उद्देश्य रिजीम चेंज करना है. इतना भर कहना था कि लोग हल्ला मचाने लगे. उन्होंने प्रचारित किया कि आंदोलनकारी हिंसा के माध्यम से देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं. कल आरएसएस के चीफ मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया, शास्त्र पूजन नहीं. आरएसएस का शस्त्र क्या अहिंसक है? वह लोगों पर फूल बरसायेगा और अहिंसक आंदोलनकारी ख़ून बरसायेगा?
राम मंदिर आंदोलन में न सुप्रीम कोर्ट को माना, न सरकार से किए वादे को निभाया, खुलेआम हिंसा का रास्ता अपनाया, तब देश में अराजकता नहीं फ़ैल रही थी? हाल-फ़िलहाल हुए अहिंसक प्रदर्शन में तथाकथित गुंडे लाठी चला रहे थे, लड़कियों के बाल खींच रहे थे और अभद्र व्यवहार कर रहे थे, ये लोग क्या हिंसा और अराजकता नहीं फैला रहे थे? इन गुंडों में से एक पिंकी चौधरी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ सिंह ने पुलिस की सुरक्षा दे रखी है. ये गुंडे अराजकता और हिंसा को बुला नहीं रहे हैं? अहिंसक आंदोलन को कुचलने के लिए जिस तरह से कानून और पुलिस का इस्तेमाल किया गया, क्या वे देश को हिंसा की ओर धकेल नहीं रहे हैं? अहिंसक आंदोलन से कैसे निपटा जाए, यह तरीका अमित शाह को सीखना नहीं था?
जंगलों से बेदख़ल कर आदिवासियों के साथ कौन सा अहिंसक तरीका सरकार ने अख्तियार किया है? जिन्होंने जंगलों को पाला-पोसा, वे उसके मालिक नहीं हैं, मालिक वे हैं, जिसने बैंकों और सरकारी सपत्तियों का दोहन कर अरबों जमा कर रखा है. बंगाल में चुनाव के बाद क्या हो रहा था? आगजनी और हिंसा भीड़ कर रही थी और सरकार उसके समर्थन में खड़ी थी.
मोहन भागवत बेचारे हड़बड़ाए हुए हैं कि रिजीम चेंज होगा तो उनकी जेड सुरक्षा का क्या होगा? उनके तथाकथित लाठीबाज़ों को वे कहाँ रखेंगे? यह सही है कि इस बार सत्ता बदलती है तो हालात वैसे ही नहीं रहेंगे, जैसे पूर्व में रहा करते थे. वक़्त के साथ हिसाब देना ही पड़ता है, चाहे आप कितने ही बड़े हैं.
आरएसएस ने जितने शस्त्रों का पूजन किया, उससे ज़्यादा शस्त्र तो राजा भैया पूज रहे थे. आजादी के आंदोलन में घर में घुसे रहे. आजादी के बाद गांधी जी हत्या का उत्सव मनाया. जब पटेल ने नकेल कसी, तो माफ़ी पर उत्तर आए. विचारों में कभी राष्ट्रीय होने का दावा किया और व्यवहार में नफ़रत के वाहक रहे.
कोई भी दिन स्थिर नहीं रहता. अस्थिरता उसका स्वभाव है. इसलिए वक़्त भी बदलेगा और शासन भी.
भारत में रिजीम चेंज होता रहा है. गांधी को लाख बुरा कहें, लेकिन उनकी सत्य और अहिंसा के प्रति निष्ठा ने देश में हिंसक विद्रोह होने नहीं दिया. बीजेपी और आरएसएस को हिंसा और असत्य से कभी परहेज नहीं रहा. वह जब दुष्प्रचार करता है और जनता को हिंसा का भय दिखा कर अहिंसक आंदोलन का चरित्र हनन करता है, तो वह एक तरह से हिंसा ही फैला रहा होता है.
बेशर्मी तो इतनी ही है कि अंकिता भंडारी के बलात्कार और क़त्ल के आरोपी को राज्यपाल बनाने वाली पार्टी अहिंसा का भजन गाती है. मोहन भागवत क्या यह नहीं जान रहे? अंकिता भंडारी के माँ और पिता सड़क पर न्याय के लिए भटक रहे हैं और आरोपी पुलिस की सलामी ले रहा है. ये सब कुकर्म देश को कहाँ ले जा रहे हैं?
