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Bihar Tender Scam में ED की बड़ी कार्रवाई, आनंद किशोर समेत कई IAS अधिकारियों को समन
Bihar Tender Scam: चर्चित टेंडर घोटाला जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच को और भी तेज कर दिया है। इस मामले से जुड़े आधा दर्जन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को समन भेजा गया है ताकि उनसे पूछताछ की जा सके। जानकारी के अनुसार, दो अधिकारियों से पूछताछ पहले ही की जा चुकी है, जबकि बाकी चार अधिकारियों को अलग-अलग दिनों में बुलाया गया है।
सोमवार को महिला आईएएस अधिकारी अभिलाषा शर्मा से पूछताछ की गई। इसके बाद मंगलवार को श्रम संसाधन विभाग के विशेष सचिव आईएएस अधिकारी सुनील यादव से लगभग छह घंटे तक पूछताछ की गई। बुधवार को धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ होने की योजना है। वहीं, आईएएस अधिकारी योगेश सागर ने अगले सप्ताह तक का समय मांगा है।
टेंडरों को प्रभावित करने में किन लोगों की भूमिका
हाल ही में, 29 अक्टूबर को संतोष कुमार मल्ल से पूछताछ की जाएगी, जबकि 30 अक्टूबर को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर को पूछताछ के लिए बुलाया गया है और उन्हें ईडी कार्यालय में उपस्थित होना होगा। यह कार्रवाई टेंडर घोटाले की जांच के एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखी जा रही है। जांच एजेंसी टेंडर आवंटन की प्रक्रिया, संभावित अनियमितताओं, और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों से पूछताछ के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि सरकारी टेंडरों को प्रभावित करने में किन लोगों की भूमिका क्या थी। पूछताछ के निष्कर्षों पर आधारित होकर, जांच एजेंसी अपनी आगे की कार्रवाई तय कर सकती है।
इस मामले में जांच की प्रक्रिया तब चर्चा में आई जब पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में सुनवाई के दौरान ईडी द्वारा की जा रही जांच और अब तक की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत की टिप्पणियों के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष पूछताछ की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी का प्रयास टेंडर प्रक्रिया में कथित हेराफेरी के पूरे नेटवर्क को समझने और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका को स्पष्ट करने पर केंद्रित है। हालांकि, समन जारी करना या किसी अधिकारी से पूछताछ करना उनकी संलिप्तता को साबित नहीं करता है।
छह वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विश्वसनीय सबूत
पटना हाईकोर्ट ने रिशुश्री की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रश्न उठाए। अदालत ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) याचिकाकर्ता को सरकारी टेंडरों में भ्रष्टाचार के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का मुख्य आरोपी बता रही है, लेकिन मौजूदा तथ्यों के अनुसार, ऐसा लग रहा है कि याचिकाकर्ता केवल एक मोहरा हो सकता है और असली आरोपी कहीं पीछे छिपा हुआ है।
ईडी ने अदालत को जानकारी दी थी कि उसने छह वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विश्वसनीय सबूत पेश किए हैं। इसके बाद तीन अधिकारियों—मुमुक्षु चौधरी, तरणी दास और उमेश कुमार—के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इस पर कोर्ट ने यह सवाल किया कि जब ईडी ने छह अधिकारियों के नाम प्रदान किए थे, तो उन सभी को प्राथमिकी में क्यों नहीं शामिल किया गया। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब जांच एजेंसी की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
