Sen your news articles to publish at [email protected]
POCSO Case Rape Accused मामले की सुनवाई कर रहे रेप आरोपी जज, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से मांगा जवाब
POCSO Case Rape Accused: सुप्रीम कोर्ट ने एक दुष्कर्म मामले में एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ दायर याचिका पर विचार करने की मंजूरी दे दी है। यह मामला उत्तर प्रदेश के एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के प्रशासन को इस मामले पर नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। नोटिस उस न्यायिक अधिकारी के खिलाफ दायर किया गया है, जो बलात्कार के आरोपी होने के बावजूद पॉक्सो मामलों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस संदर्भ में आदेश जारी किया है। पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इससे सम्बंधित एक याचिका को खारिज कर दिया था। यह मामला एक महिला के यौन शोषण से जुड़ा है, जिसमें दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट भी दाखिल की है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील राकेश कुमार सिंह ने अदालत को सूचित किया कि कम से कम उस न्यायाधीश से न्यायिक कार्य वापस लिया जाना उचित होगा। हालांकि, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने एक संक्षिप्त आदेश में कहा कि नोटिस जारी किया जाए और जवाब 11 दिसंबर तक मांगा जाए।
मयूर विहार पुलिस थाने में दर्ज हुआ मामला
याचिकाकर्ता ने आठ दिसंबर 2022 को मयूर विहार पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें उसने एक न्यायिक अधिकारी पर आरोप लगाया, जिससे वह एक मैट्रिमोनियल साइट पर मिली थी। महिला का कहना है कि उस अधिकारी ने उसे बार-बार शादी करने का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किया।
जनवरी 2023 में, दिल्ली पुलिस ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से उस न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मांगी। महिला ने जानकारी दी कि दो महीने बाद, दिल्ली उच्च न्यायालय ने जज को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। दी, लेकिन पुलिस को जांच जारी रखने की अनुमति दी।
बाद में पुलिस ने मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका बयान दर्ज किया। जून 2023 में, पुलिस ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को एक रिमाइंडर भेजा, जिसमें न्यायिक अधिकारी के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने की अनुमति के लिए शीघ्र निर्णय की मांग की गई। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उस अधिकारी के खिलाफ पहले से ही एक विजिलेंस जांच चल रही है।
अक्टूबर 2024 में, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जांच की अनुमति प्रदान की और न्यायिक अधिकारी को जांच में सहयोग देने का निर्देश दिया। कुछ समय बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आ गया।
