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Jabalpur AK-47 चोरी केस में बड़ा फैसला: NIA कोर्ट ने 5 दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई

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जबलपुर (Jabalpur): National Investigation Agency (NIA) की विशेष अदालत ने 2012 के चर्चित AK-47 चोरी मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को दस-दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने बुधवार को सुनवाई पूरी होने के बाद पांच आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि नौ आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था।

विशेष अदालत के न्यायाधीश Madhukar Singh ने दोषी पाए गए अभियुक्तों को दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। जानकारी के अनुसार इनमें से कुछ आरोपी पहले ही करीब आठ वर्ष की सजा काट चुके हैं और अब उन्हें शेष दो वर्ष की सजा काटनी होगी।

2012 में COD से चोरी हुई थीं 70 AK-47 राइफलें

पूरा मामला वर्ष 2012 का है। उस समय Jabalpur स्थित Central Ordnance Depot से करीब 70 अत्याधुनिक AK-47 राइफलें चोरी हो गई थीं।

जांच में सामने आया कि चोरी किए गए हथियारों को बिहार के Munger जिले के हथियार तस्करों के माध्यम से अपराधियों और नक्सलियों तक पहुंचाया जा रहा था।

पुलिस कार्रवाई में हुआ था खुलासा

मामले का खुलासा तब हुआ जब जमालपुर के जुबली वेल चौक से पुलिस ने तीन AK-47 राइफल बरामद कर हथियार तस्कर मोहम्मद इमरान को गिरफ्तार किया। इसके बाद STF और जिला पुलिस ने छापेमारी कर शमशेर आलम उर्फ वीरू और रिजवाना बेगम को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तारी के बाद कई हथियार बरामद किए गए और जांच में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।

फैक्ट्री कर्मचारियों पर भी लगे आरोप

जांच में पता चला कि आयुध कारखाने का कर्मचारी पुरुषोत्तम रजक और COD के स्टोरकीपर सुरेश ठाकुर हथियार चोरी कर उन्हें पांच से सात लाख रुपये में तस्करों को बेच देते थे।

इसके बाद तस्कर एजेंटों के जरिए इन हथियारों की सप्लाई अलग-अलग जिलों और राज्यों में करते थे।

नक्सलियों और अपराधियों तक पहुंचे हथियार

पुलिस जांच के अनुसार 2012 से अब तक करीब 60 AK-47 राइफलें मुंगेर लाई गई थीं। इनमें से कुछ हथियार नक्सलियों को और बाकी अपराधियों को बेचे गए थे।

मामले में National Investigation Agency ने जांच के दौरान करीब 20 AK-47 राइफलें बरामद की हैं। इनमें से मुंगेर पुलिस ने बारदाह गांव से 12 AK-47 राइफलें बरामद की थीं।

इस मामले में जमालपुर के मोफस्सिल थाना में 29 सितंबर 2018 को IPC और UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। बचाव पक्ष के वकील Rajneesh Kumar ने बताया कि अदालत ने साक्ष्य के अभाव में नौ अभियुक्तों को बरी कर दिया है।

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