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Bangladesh election 2026: BNP की ऐतिहासिक जीत, अब शेख हसीना की वापसी सबसे बड़ा एसिड टेस्ट

Bangladesh election 2026: बांग्लादेश के ताज़ा आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को दो-तिहाई से अधिक बहुमत मिला है और तारिक रहमान नई राजनीतिक धुरी के रूप में उभरकर सामने आए हैं। यह नतीजा न सिर्फ ढाका की सत्ता बदलने का संकेत है, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए भी एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अब सवाल यह है कि यह जनादेश बांग्लादेश को किस दिशा में ले जाएगा और नई सरकार किन “एसिड टेस्ट” का सामना करेगी।
जमाते इस्लामी बांग्लादेश को पूरी तरह से पराजय का रास्ता दिखलाया है। इस तरह इस चुनाव में सीधे-सीधे पाकिस्तान चुनौती का मुकाबला करके ही बांग्लादेश नए दौर का दवा कर सकता। किसी के साथ यह भी कह देना यहां जरूरी है कि शेख हसीना वापस बांग्लादेश लौट सकेंगी तभी फिर से शुरुआत माना जाएगा। बांग्लादेश में लोगों ने फंडामेंटलिस्ट पार्टी जमाते इस्लामी बांग्लादेश को पूरी तरह से पराजय का रास्ता दिखलाया है। इस तरह इस चुनाव में सीधे-सीधे पाकिस्तान की हार हुई है।
और बांग्लादेश का कोई पड़ोसी देश है तो वह है भारत।
बांग्लादेश में चुनी हुई सरकार को अपदस्थ किया गया
बेहतर स्थिति लाने के लिए भारत के साथ मित्रता का हाथ बढ़ाना आवश्यक होगा।बजेन जी के उन्माद केदार से बांग्लादेश में चुनी हुई सरकार को अपदस्थ किया गया था। उसको दल को बांग्लादेश के अवाम ने नजरअंदाज कर दिया। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग चुनाव मैदान में नहीं थी इसलिए इसके समर्थकों ने भी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी BNS को वोट दिया। इस तरह एक नकारात्मक अवस्था से बाहर निकलने में नेशनलिस्ट पार्टी बांग्लादेश के लिए फिर से खुले हुए रास्ते का माध्यम बन गई है।
बांग्लादेश के निर्माण के समय भारत की इस देश में विशेष स्थिति
बांग्लादेश लगभग भारत की सीमा से घिरा हुआ है और एक तरफ बंगाल की खड़ी है। एक छोटे से हिस्से से म्यांमार बांग्लादेश की सीमा से मिलता है। इस तरह बांग्लादेश की भू राजनीतिक स्थिति भारत के साथ उसे जोड़कर रखती है। तारिक अनवर ने भले ही विस्तार से यह कहा है, की बांग्लादेश अपने विदेश संबंध के मामले में किसी भी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। परंतु बांग्लादेश के निर्माण के समय से ही भारत की इस देश में विशेष स्थिति है।
चुनाव के समय मतदाता ने भी अपने मतों के द्वारा भारत से ही अपने रिश्ते की ओर देखा है। भारत को भी अपने नॉर्थ ईस्ट के राज्यों से सड़क रास्ते से जाने के लिए बांग्लादेश से ही पैसेज मिल सकता है। बांग्लादेश के अल्पसंख्यक भी भारत के लिए एक जिम्मेदारी की तरह से हैं। बांग्लादेश एक छोटा सा देश है और इसके 1971 में अस्तित्व में आने के बाद सबसे पहले भारत ने इस देश के रूप में मान्यता दी थी। दूसरा देश था सोवियत रसिया जिसने बांग्लादेश को मान्यता दी थी।
बांग्लादेश में मतदाताओं की संख्या 12 करोड़
यह सघन आबादी वाला देश है और गरीबी से निकलकर विकासशील देश की दिशा में है। यहां के मतदाताओं की संख्या 12 करोड़ तक है। अपनी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के गंभीर रूप से बीमार होने के बाद 17 सालों के अंतराल पर तारीक अनवर बांग्लादेश आए थे।खालिदा जिया 15 वर्षों तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थी। इसके बाद 17 वर्षों तक शेख हसीना प्रधानमंत्री थी और 2024 के बांग्लादेश चुनाव के बाद वे तब सत्ता में आई जब बाकी दलों ने बहिष्कार कर दिया था।
इस वजह से 2024 से अगस्त 25 तक प्रधानमंत्री रहते हुए भी वह जनता का जनादेश मजबूती से नहीं महसूस कर सकीं थी। और इस माहौल में बांग्लादेश की आर्मी को और वहां के प्रशासन तंत्र को वह अच्छी तरह से नहीं संभाल सकी थी।परंतु जब बड़ी संख्या में लाहौर में लोग प्रधानमंत्री आवास की तरफ बढ़ रहे थे तो आर्मी ने अपना चोपर यानी हेलीकॉप्टर देकर उन्हें भारत जाने का रास्ता दे दिया था।
शेख हसीना को भीड़ तंत्र के द्वारा सत्ता से हटाने की कोशिश
शेख हसीना को भीड़ तंत्र के द्वारा सत्ता से हटाने की कोशिश हुई थी। इस बार सेवा ने अपने हाथ में सीधा शासन लेने की जगह पर मोहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार बनाकर शासन प्रशासन चलने दिया। माइक्रो फाइनेंसिंग में भले ही यूनुस को नोबेल पुरस्कार मिला था, परंतु शासन की बागडोर संभालने के बाद में आर्थिक तौर पर भी देश का खास कुछ भला नहीं कर पाए थे।
जानते हैं कि 17 साल लंदन में रहकर अनवर बांग्लादेश की अपनी मां की पार्टी के उपा-ध्यक्ष पद पर बने हुए थे।पहले के अंतरिम सरकार ने उनके आने के लिए एक अनुकूलता बना दी थी कि शेख हसीना की पार्टी को गैर कानूनी बना दिया था। शेख हसीना भारत में हैं , और अज्ञात स्थान पर हैं। बांग्लादेश के अंतरिम सरकार ने शेख हसीना के ऊपर एक मुकदमा चला करके उन्हें फांसी की सजा मुकर्रर कर रखी है।भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मुकदमे के ऊपर अपनी शंका रखता आया है। यह किसी बजापता सरकार के द्वारा और खुले माहौल में चला हुआ मुकदमा नहीं था।
बांग्लादेश में चुनौतियां बहुत
मुकदमे की पहली के लिए शेख हसीना मौजूद नहीं थी।बांग्लादेश में चुनौतियां बहुत है। तारीक अनवर अपनी पार्टी के लिए बहुमत सुनिश्चित कर चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दे दी थी। तब मतगणना के दौर में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर बात करके उन्हें धन्यवाद दे दिया। इसके पहले चुनाव के दरमियान जब खालिदा जिया की मृत्यु हुई थी तब भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस जयशंकर, उनके क्रीमेशन में शामिल हुए थे। जयशंकर ने तारीक अनवर को व्यक्तिगत तौर पर बता दिया था कि भारत बांग्लादेश के साथ सहयोग का रिश्ता रखेगा।
नए प्रधानमंत्री को शेख हसीना के वापसी के लिए चुनौती पूर्ण तरीके से काम करना होगा
बांग्लादेश भारत का एक हितैषी देश है। इसमें अन्य बातें आएंगी परंतु प्रिंसिपल बात यह है कि नए प्रधानमंत्री को शेख हसीना के वापसी के लिए चुनौती पूर्ण तरीके से काम करना होगा।भारत के शासक दल के ऊपर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होगी कि वह अपने चुनावी एजेंडा में बांग्लादेशी बांग्लादेशी जैसे नारों से परहेज करना सीख ले।भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ अपने रिश्ते को सुधारने के लिए बांग्लादेश को एक कुंजी के रूप में लेना होगा।
इसके बाद बाकी सब चुनौतियां , खुद बांग्लादेश के अंदर की चुनौतियां बनी हुई है।।वहां के रोजगार और पढ़ाई लिखाई का मसाला किस तरह सुलझाया जाता है इस पर भारत बांग्लादेश के संबंध की निर्भरता रहेगी।
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