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Bihar Police Reform: अब डिजिटल रडार पर होंगे राज्य के IPS, मुख्यमंत्री के निर्देश पर नया मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार
Bihar Police Reform: बिहार में आईपीएस अधिकारियों के कार्यों पर अब सरकार की सीधी डिजिटल निगरानी स्थापित की जाएगी। केंद्र सरकार के निर्देश के अनुसार, बिहार में आइगॉट कर्मयोगी पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण और मूल्यांकन को अनिवार्य कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत सभी अधिकारियों को अपने सेवाकाल के आधार पर निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करना होगा और अपनी संपूर्ण जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
प्रक्रिया में नौकरी के प्रदर्शन जैसी जानकारियाँ शामिल
इस प्रक्रिया में सेवा विवरण, कैडर, प्रशिक्षण की स्थिति और नौकरी के प्रदर्शन जैसी जानकारियाँ शामिल की जाएँगी। इससे सरकार को प्रत्येक अधिकारी की गतिविधियों और क्षमताओं के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती रहेगी।
यदि कोई अधिकारी निर्धारित समय के भीतर कोर्स पूर्ण नहीं करता या अपनी प्रोफाइल को अपडेट नहीं करता, तो उसका मूल्यांकन प्रभावित होगा। इसका मतलब यह है कि अब लापरवाही के लिए बहुत कम जगह होगी और अधिकारियों पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव बढ़ जाएगा। डिजिटल निगरानी के माध्यम से सरकार को यह सुविधा मिलेगी कि वह जान सके कि किस अधिकारी को कौन सी जिम्मेदारी पर नियुक्त करना है।
सूत्रों के अनुसार, अब पोस्टिंग और पदोन्नति के निर्णय भी रिकॉर्ड के आधार पर किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस प्रणाली से प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ेगी, कार्यों की गति तेज होगी, और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
आईपीएस अधिकारी की संपूर्ण जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध
बिहार में अब हर आईपीएस अधिकारी की संपूर्ण जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी, जिसे डिजिटल प्रोफाइल के रूप में जाना जाएगा। इससे सरकार को उनके वास्तविक स्थिति का निरंतर ज्ञान मिलता रहेगा। अधिकारी के लिए कोर्स पूरा करना अनिवार्य होगा; यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो इसका प्रभाव उनकी एपीएआर पर पड़ेगा। यह व्यवस्था अधिकारियों को समय पर प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित करेगी।
वहीं, मूल्यांकन की प्रक्रिया अब कागजी व्यवस्था के बजाय ऑनलाइन होगी, जिससे पारदर्शिता में वृद्धि होगी और अनियमितताओं की संभावना कम हो जाएगी। अधिकारियों की पोस्टिंग और पदोन्नति अब उनके प्रदर्शन और रिकॉर्ड के आधार पर की जाएगी, जिससे सक्षम अधिकारियों को आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।
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