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Bihar politics: लालू-नीतीश युग का अंत? बिहार में भाजपा की बड़ी तैयारी, हिंदी पट्टी के आखिरी गढ़ में अपना सीएम बनाने का मास्टरप्लान!
बिहार की राजनीतिक (Bihar politics) गतिविधियाँ एक महत्वपूर्ण बदलाव के चरण में प्रवेश कर रही हैं। लालू प्रसाद यादव के शासनकाल के बाद अब नीतीश कुमार का युग भी समाप्ति की ओर है। जो लंबे समय तक राज्य की सत्ता के मुख्य व्यक्ति रहे, नीतीश अब राजनीति के इस स्तर से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय राजनीति की ओर अग्रसर होते दिखाई दे रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी का लंबे समय से प्रयास
जब उन्होंने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया, तो यह संभावना प्रबल हुई है कि भारतीय जनता पार्टी, जो लंबे समय से इस प्रयास में लगी रही है, इस बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने में सफल हो सकती है। यदि बीजेपी का कोई नेता राज्य के मुखिया के पद पर पहुँचता है, तो यह क्षण पार्टी के लिए ऐतिहासिक होगा।
बिहार की राजनीति में दो दशकों से अधिक समय तक प्रभावी रहे नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राज्यसभा जाने के अपने निर्णय की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता के विश्वास के कारण राज्य विकास के नए आयाम छू सका है, और अब वे राज्यसभा में जाकर व्यापक कार्य करना चाहते हैं। उनका यह निर्णय महज एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता संरचना में संभावित परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है।
बिहार में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी
बीते कुछ वर्षों में बिहार की राजनीतिक स्थिति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने ग्राफ को लगातार ऊंचा किया है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी ने 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर इतिहास रचा, जबकि जेडीयू 85 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। गठबंधन की राजनीति के चलते मुख्यमंत्री पद नीतीश कुमार के पास गया, जिन्होंने दसवीं बार इस पद का कार्यभार संभाला। हालाँकि, नई सरकार में बीजेपी का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, क्योंकि मंत्रिमंडल में पार्टी को ज्यादा मंत्री मिले हैं।
भाजपा ने अपने चुनावी वादों को निभाते हुए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया
बिहार में राजनीतिक शक्ति संतुलन में बदलाव की शुरुआत 2020 के विधानसभा चुनावों से हुई। उस चुनाव में भाजपा ने 74 सीटें हासिल कीं, जबकि जेडीयू को केवल 43 सीटों पर संतोष करना पड़ा। बावजूद इसके, भाजपा ने अपने चुनावी वादों को निभाते हुए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया। उस समय लालू प्रसाद यादव की आरजेडी भी एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभरी थी, जिसके कारण भाजपा के लिए गठबंधन बनाए रखना रणनीति रूप से जरूरी था।
भाजपा ने देश के कई राज्यों में अपनी सरकार बनाई है, लेकिन बिहार ऐसा एक महत्वपूर्ण हिंदी भाषी राज्य है, जहां वह अब तक मुख्यमंत्री नहीं बना पाई है। यहां तक कि राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद, भाजपा अपने नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठा सकी है।
बिहार की राजनीति के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत
यह उल्लेखनीय है कि भाजपा और जेडीयू के बीच गठबंधन 2005 में स्थापित हुआ था, और लंबे समय तक जेडीयू इस गठबंधन में प्रमुख भूमिका निभाती रही। हालाँकि, स्थिति में बदलाव आया है। बिहार में भाजपा के कार्यकर्ताओं ने पार्टी के लिए अपनी स्थिति को मजबूत किया, जिससे धीरे-धीरे राजनीतिक परिदृश्य भाजपा के पक्ष में बदलता गया और और पार्टी राज्य की सबसे प्रभावशाली पार्टी बनकर उभर रही है।
नीतीश कुमार का राज्यसभा में जाना बिहार की राजनीति के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यदि भाजपा का कोई सदस्य मुख्यमंत्री बनता है, तो यह बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन साबित होगा और इससे सत्ता के समीकरण भी पूरी तरह से परिवर्तित कर सकते हैं।
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