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CM Nitish, पीके और Tejashwi की यात्रा, बिहार में चढ़ेगा सियासती पारा
सूर्य के उत्तरायण होते ही बिहार में राजनीतिक हलचलें तेज हो जाएंगी। यह गतिविधियां विभिन्न राजनीतिक दलों के स्तर पर देखने को मिलेंगी, और सरकार की ओर से भी कुछ पहल शुरू होंगी।
मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों की एंट्री हो सकती है, जबकि विधानमंडल के बजट सत्र में बिहार के भविष्य से जुड़ी कुछ हद तक तस्वीर साफ हो जाएगी। मुख्यमंत्री नीतीश (CM Nitish) समृद्धि यात्रा पर निकलेंगे, वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान आभार यात्रा का आयोजन करेंगे। तेजस्वी यादव (Tejashwi yadav) भी अपनी यात्रा पर जा सकते हैं, और प्रशांत किशोर के बिहार आने की संभावना अगले कुछ महीनों में हो सकती है।
जदयू का एक करोड़ सदस्यों का लक्ष्य
जदयू ने एक करोड़ सदस्यों का लक्ष्य हासिल करने के लिए पंचायत स्तर पर संगठन बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कांग्रेस के लिए अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए छोटे-छोटे आंदोलनों के जरिए विधायकों को एकजुट रखना चुनौतीपूर्ण है, वहीं राजद और भाजपा के लिए प्रदेश कार्यसमिति का गठन भी एक बड़ा कार्य है।
सभी पक्षों को संतुष्ट रखने और समायोजित करने की यह चुनौती इसलिए भी बढ़ती जा रही है, क्योंकि एक ओर बड़ी जीत ने सभी को उत्साहित किया है, जबकि दूसरी ओर कड़ी हार के कारण मनोबल भी गिरने लगा है।
कांग्रेस में फूट की बातें
अब खरमास का समय समाप्त हो गया है, और चुनावी परिणामों पर विचार-विमर्श के बाद राजनीति में नई पहलों और रणनीतियों को अपनाने में कोई हिचकिचाहट नहीं रह गई है। एक पक्ष के आत्मविश्वास से भरे होने के कारण दूसरे पक्ष के लिए चुनौतियों का सामना करना कठिन हो सकता है। उदाहरण के लिए, कांग्रेस के संदर्भ में, यह चर्चा काफी बढ़ी हुई है कि उसके छह विधायकों का झुकाव एनडीए की ओर है।
कड़ाके की ठंड में पटना के सदाकत आश्रम में आयोजित दही-चूड़ा भोज में ये विधायक शामिल नहीं हुए, जिससे पार्टी में फूट की बातें और भी सक्रिय हो गईं।
बिहार में दही-चूड़ा भोज का आयोजन हमेशा से राजनीतिक संवाद और बदलाव का महत्वपूर्ण मंच बनता रहा है। 2018 में इस भोज के बाद कांग्रेस में एक बड़ी फूट देखने को मिली थी।
राजद के लिए एक सकारात्मक संभावना
इस बार, लोजपा के मंत्री संजय कुमार सिंह और भाजपा के लखेंद्र पासवान ने दावा किया है कि कांग्रेस के विधायक एनडीए में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो विधानसभा में जदयू-भाजपा का संतुलन बड़ा बदलाव देख सकता है।
हालांकि, कांग्रेस में किसी भी प्रकार की फूट से पहले राजद के सामने महागठबंधन को मजबूत बनाए रखने की चुनौती है, जो अब कांग्रेस के नेताओं के बयानों से प्रभावित होती दिखाई दे रही है।
इस बीच, राजद के लिए एक सकारात्मक संभावना भी उभर रही है। तेजप्रताप यादव के नेतृत्व में बुधवार को उनके द्वारा दिए गए दही-चूड़ा भोज में उपस्थित होकर लालू प्रसाद ने इसका संकेत भी कर दिया।
परिवार की एकता के महत्व की बात करते हुए लालू ने कहा कि उन्हें तेजप्रताप का आशीर्वाद प्राप्त है। भोज के निमंत्रण के बहाने तेजस्वी और तेजप्रताप सात महीने बाद एक-दूसरे से गले मिल चुके हैं।
नीतीश कुमार 16 जनवरी से राज्यव्यापी समृद्धि यात्रा
इसी बीच, तेजप्रताप के एनडीए में शामिल होने या अपनी एक अलग रणनीति अपनाने पर कहीं चर्चा हो रही है। भोज के बाद, उन्होंने राजद को “राष्ट्रीय जयचंद दल” के नाम से संबोधित किया।
नीतीश कुमार 16 जनवरी से राज्यव्यापी समृद्धि यात्रा की शुरुआत करने वाले हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य विकास योजनाओं की समीक्षा करना, जनता से फीडबैक लेना और राजनीतिक संदेश देना होगा।
चुनाव में जीत के बाद यह यात्रा सरकार की ताकत दिखाने और विपक्ष को कमजोर करने की दिशा में एक कदम साबित हो सकती है।
वाम दलों को इस समय कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा
भाजपा के कई कार्यक्रम पूरे वर्ष चलते रहते हैं, जबकि वाम दलों को इस समय कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसका कारण यह है कि वामपंथी दल, विशेष रूप से भाकपा-माले, को इस बार जन सुराज पार्टी से भी कम वोट मिला है।
जदयू पंचायत स्तर पर संगठनात्मक चुनाव शुरू करने जा रहा है। इस पार्टी का लक्ष्य एक करोड़ सदस्यों की संख्या हासिल करना है, जिससे उसकी नींव को और मजबूत किया जा सके।
भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद नितिन नवीन ने बिहार मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। इसके परिणामस्वरूप अब सरकार में दस पद रिक्त हैं। मौजूदा संभावनाएं यह हैं कि बजट सत्र से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है।
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