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Bihar में criminals की खैर नही, ड्रोन से अब रखी जायेगी निगरानी
बिहार (Bihar) पुलिस जल्द ही उन्नत तकनीक से युक्त होने वाली है। राज्य में कानून व्यवस्था और निगरानी को बेहतर बनाने के लिए उच्च क्षमता वाले ड्रोन खरीदे जाएंगे। इस पर लगभग 25 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। केंद्रीय सरकार की हाई पावर कमेटी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
यह जानकारी शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता में एडीजी (आधुनिकीकरण) सुधांशु कुमार ने प्रदान की। उन्होंने बताया कि इस साल मार्च का अंत होने तक लगभग 50 ड्रोन खरीदे जाने की योजना है।
सभी पुलिस जिलों को एक-एक ड्रोन
राज्य के सभी पुलिस जिलों को एक-एक ड्रोन प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) के लिए 10 उच्च गुणवत्ता वाले ड्रोन खरीदे जाएंगे। इन ड्रोन का उपयोग मुख्य रूप से दियारा और दुर्गम क्षेत्रों में निगरानी के लिए किया जाएगा। एडीजी ने बताया कि जो ड्रोन जिलों को मिलेंगे, वे 45 मिनट तक लगातार उड़ान भरने की क्षमता रखते हैं। ये ड्रोन भीड़ प्रबंधन में सहायता प्रदान करेंगे और अपराध नियंत्रण एवं निगरानी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इन ड्रोन में ऑटो नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) प्रणाली की सुविधाएं मौजूद होंगी, जिससे सड़क पर चलने वाले वाहनों की नंबर प्लेट की पहचान की जा सकेगी। इससे संदिग्ध वाहनों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
थानों में सीसीटीवी कैमरे और डैशबोर्ड लगाए जाएंगे
एडीजी सुधांशु कुमार ने जानकारी दी कि राज्यभर में सभी थानों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों से युक्त सर्विलांस सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए 112 करोड़ 46 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिसके तहत थानों में सीसीटीवी कैमरे और डैशबोर्ड लगाए जाएंगे।
साथ ही, स्मार्ट पुलिसिंग से संबंधित उपकरणों, थानों के निर्माण और पुलिसकर्मियों के आवास के विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इन सभी पहलुओं के लिए कुल 384 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। विभिन्न जिलों में 11 नए थाना भवनों का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पटना के लोदीपुर में एसटीएफ का मुख्यालय, बैरक और अनुमंडल कार्यालय भी बनाए जाने की योजना है।
साइबर यूनिट की भी स्थापना
एडीजी ने जानकारी दी है कि मार्च के अंत तक राज्य में सात नए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) स्थापित किए जा सकते हैं। वर्तमान में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और पूर्णिया में एफएसएल पहले से ही कार्यरत हैं, और इसके अतिरिक्त 34 मोबाइल एफएसएल यूनिट भी सक्रिय हैं।
नए कानूनों की वजह से फॉरेंसिक जांच की आवश्यकता में बढ़ोतरी हुई है, जिससे एफएसएल का विस्तार करना आवश्यक हो गया है। इसके अलावा, राज्य में एक साइबर यूनिट की भी स्थापना की गई है।
पटना में सभी सचिवालय भवनों और जिला स्तरीय कार्यालयों की निगरानी सीसीटीवी के माध्यम से की जाएगी। प्रमुख स्थलों पर डैशबोर्ड भी स्थापित किए जाएंगे। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस परियोजना पर लगभग 23 करोड़ 58 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके साथ ही, हाईटेक ड्रोन और नवीनतम संसाधनों का उपयोग करते हुए बिहार पुलिस की ताकत और निगरानी क्षमता को और बढ़ाया जाएगा।
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