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दक्षिण बिहार के 4 जिलों में गंगाजल से 6 जलाशय रिचार्ज: किसानों की कमाई दोगुनी, सिंचाई में क्रांति!

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पटना, 22 जनवरी 2026: बिहार के दक्षिणी पठारी इलाकों में भूगर्भ जल संकट से जूझ रहे किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी। केंद्र सरकार ने गंगा के अतिरिक्त पानी को पाइपलाइन के जरिए दक्षिण बिहार के 6 जलाशयों तक पहुंचाने की योजना को मंजूरी दे दी है। इससे लखीसराय, जमुई, मुंगेर और नवादा जिलों में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी, भूजल रिचार्ज होगा और किसानों की आय दोगुनी होने की उम्मीद है।

गंगा का बर्बाद पानी अब बिहार की ताकत बनेगा

गंगा नदी में मानसून के दौरान इतना पानी आता है कि वह अपनी क्षमता से ज्यादा बह जाता है। उत्तर प्रदेश से चौसा (बिहार) तक प्रवेश करने वाले पानी से 13 गुना ज्यादा जल बंगाल होते हुए समुद्र में विलीन हो जाता है। फरक्का बैराज से कुछ पानी बांग्लादेश जाता है, बाकी बेकार बहा दिया जाता है।विमर्श न्यूज़ ने लंबे समय से यह सुझाव दिया था:

  • गंगा की गाद और बालू को भारी मशीनों से फ्लश कर समुद्र में बहाना, ताकि नदी की पानी रखने की क्षमता बढ़े।
  • लिफ्ट पंप और पाइपलाइन से गंगाजल को दक्षिण बिहार के ऊंचे जलाशयों तक ले जाना।

बिहार सरकार ने इसे साकार किया। पहले राजगीर और गया तक गंगाजल पहुंचाया गया, अब नई योजना पर काम तेज।

किन जलाशयों तक पहुंचेगा गंगाजल?

केंद्रीय जल आयोग की मंजूरी के बाद बिहार सरकार अगले 2 महीनों में डीपीआर तैयार करेगी। प्रभावित जलाशय:

  • लखीसराय: बास्कुंड, मोरवे
  • जमुई: अमृत श्रीखंड, आंजन, गरही
  • मुंगेर: जलकुंड, जलसे

ये 6 जलाशय 4 जिलों की सिंचाई करेंगे और भूजल रिचार्ज से पीने के पानी की कमी दूर होगी। भविष्य में 23 और जलाशयों तक योजना विस्तारित हो सकती है।

किसानों और पर्यावरण को फायदा

  • सिंचाई क्रांति: रबी और खरीफ फसलें लंबे समय तक हरी रहेंगी, आय दोगुनी।
  • भूगर्भ जल संकट समाधान: दक्षिण बिहार का प्लेटो इलाका सूखे से परेशान, अब रिचार्ज से राहत।
  • इकोसिस्टम सुधार: गंगाजल बर्बादी रुकेगी, पर्यावरण संवर्धन होगा।

जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा, “यह योजना बिहार की जल प्रबंधन क्रांति की शुरुआत है। केंद्र की मदद से जल्द अमल होगा।” विमर्श न्यूज़ की पुरानी सिफारिशें अब हकीकत बन रही हैं।नोट: अटल बिहारी वाजपेयी की नदियां जोड़ो परियोजना अधर में लटकी रही, लेकिन पाइपलाइन मॉडल सफल साबित हो रहा है।

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