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Donkey Route: डोंकी रूट से अमेरिका पलायन करने वाले कई लोग पश्चिम के भ्रम में आकर धोखा खाते हैं

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विमर्श न्यूज डेस्क

Donkey Route: डोंकी रूट से अमेरिका पलायन करने वाले कई लोग पश्चिम के भ्रम में आकर धोखा खाते हैं. शॉर्टकट अपना करके समृद्ध बन जाने की अभिलाषा को पूरी तरह से विराम दिया जाना संभव नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने हथकड़ी पहनकर भारतीयों को वापस भेजते हुए यह दिखला दिया था कि अमेरिका में भारतीयों की इज्जत कितनी है.

भारत में अमेरिका के इस आचरण के प्रति जो प्रतिक्रिया होनी चाहिए थी वह नहीं हुई.

भारत में इस घटना को एक सबक के रूप में प्रचारित किया जाना चाहिए था. डंकी रूट से अमेरिका जाने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए इसको चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए. परंतु भारत में विरोध मोदी सरकार का किया गया. विपक्ष ने मोदी सरकार की आलोचना करके अपना दायित्व पूरा समझ लिया. परंतु अमेरिका पलायन करने वाले लोगों के लिए रचनात्मक दायित्व भी है. लोगों को इस तरह के पलायन से रोकने का दायित्व है.

मजबूरन पलायन हो रहा है उसके लिए भी हमारी सरकार की जिम्मेदारी बनती है. सरकार की आलोचना की जाए यह जरूरी है . पर इतना भर करके दायित्व पूरा समझ लिया गया. यह बहुत अधूरी और एकांगी भूमिका है.

अमेरिका से जो लोग वापस किए जा रहे हैं उनको लेकर जहाज अमृतसर आ रही है . और यहां से कुछ लोग हरियाणा और गुजरात लौट जाते हैं.

बिहार से भी पलायन होता है और आंध्र प्रदेश से भी होता है. मुख्य रूप से बिहार और आंध्र के लोग दुबई या नजदीक के देशों में जाते हैं.

सवाल यह है कि डंकी रूट पर खतरा लेने या अमेरिका जाकर अवैध तरीके से रहने वाले में बिहारी लोग क्यों नहीं होते? होते होंगे, पर इनकी संख्या बहुत कम है.

अमेरिका और पश्चिमी देशों में जाने के खतरे लेने की प्रवृत्ति है. यह प्रवृत्ति थोड़ा संपन्न हो रहे लोगों की और अधिक संपन्न होने की लालसा ही है. इससे गरीबों का इतना संबंध नहीं है जितना बहुत तेजी से सुखी संपन्न और समृद्ध बन जाने की लालसा से है.

ऐसी लालसा गलत रास्ते पर या दुस्साहस के लिए आमंत्रण भेजती है.
ऐसे लोगों को अमेरिका के सत्य और पश्चिमी दुनिया के सत्य की जानकारी दे करके कुछ हद तक रोका जा सकता है.

परंतु शॉर्टकट अपना करके समृद्ध बन जाने की अभिलाषा को पूरी तरह से विराम दिया जाना संभव नहीं है

ऐसे लोग कई बातों के शिकार होते हैं. अपने यहां हिंदू देश भावना को संकीर्ण देशभक्ति की की दिशा में ले जाने वाले लोग हैं. ऐसे हिंदू अभियान वाले लोग भी पश्चिमी देशों और अमेरिका में नशीली भेदभाव का शिकार होने के लिए चल ही जाते हैं.

अमेरिका अपना देश नहीं है और ईसाई धर्म श्रेष्ठ भावना सहज ही वहां के मूल निवासी लोगों के मन में है. यूरोपीय देशों में भी ऐसी भावना है. अन्य देशों के लोगों और धर्म के प्रति अमेरिका में नस्ली विरोध की भावना है

हिंदू फोबिया. अमेरिका में एक शब्द चलता है हिंदू फोबिया. अमेरिका के हिंदुओं के प्रति नस्ल भेद की वजह से यह कहा जाता है.

अमेरिका का सपना पालने वाले लोगों को हकीकत से रूबरू करना चाहिए.
यह उन लोगों का काम है जो अमेरिका में कंपनियों में सुरक्षित नौकरी हासिल कर कर चुके हैं.

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जो सॉफ्टवेयर क्षेत्र में या अन्य इंजीनियर है. या यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे हैं. इसी तरह नीचे की सर्विस सेक्टर की नौकरियों में भी जो लोग हैं उनका यह दायित्व है. .

अमेरिका में 50 लाख डॉलर का गोल्ड कार्ड लेने वाले लोगों को ट्रंप अमेरिका की पक्की नागरिकता देने का वादा कर रहे हैं. भारतीय रुपया में यह 43 करोड़ हो जाता है.

गोल्डन वीजा पाने के लिए भी लोग चार-पांच करोड़ देते हैं.

अवैध रास्ते से अमेरिका पहुंचने के लिए एजेंट को 50 लख रुपए से एक करोड रुपए तक देते हैं.

भारतीयों में से कोई यदि 40 करोड रुपए से अधिक की रकम अपने देश से इकट्ठा कर ले तो यहां उसके लिए कैसी स्थिति पैदा होगी? यह सवाल है. इतनी रकम जमा करके कोई व्यक्ति गोल्ड बॉन्ड खरीदे और अमेरिका की स्थाई नागरिकता की अपेक्षा करें, यह कितना महंगा और घाटे का सौदा हो सकता है. इस पर विवेक के साथ विचार करने का वातावरण होना चाहिए.

डोंकी root से जाने वाले लोग भी सारा कुछ पा लेने के लिए अपने यहां करोड़ रुपया जमा करते हैं .

एक और ध्यान देने वाली बात यह है कि अमेरिका का एकडॉलर 86 रुपए या 87 रुपए के बराबर होता है. परंतु डॉलर यदि भारत भेज दे रहे हैं तब ऐसा होगा. अमेरिका में $1 से आप उतना कुछ नहीं पा सकते हैं जितना भारत में.

इसलिए अमेरिका या पश्चिमी देशों में जाने — वहां रहने — वहां से कमाने — वहां बस जाने की हसरतों के बारे में चर्चा चलाई जाए यह जरूरी है. इस पर खुलकर चर्चा जारी रखनी चाहिए.

वहां $1 से आप कितना खरीद सकते हैं इसे समझे बगैर अमेरिका का भ्रम पालना कितना महंगा है , यह भी जानना चाहिए.

यह पहली बार नहीं है कि अमेरिका से लोगों को वापस भेजा गया है. वापस आकर फिर जमीन या संपत्तियां बेचकर लोग अमेरिका जाने की कोशिश करते हैं . कई लोग हैं जो एक से ज्यादा दफा अमेरिका से वापस किए गए हैं.

विद्यार्थियों में भी यह चलन है, कि भारी रकम खर्च करके वे अमेरिका ऑस्ट्रेलिया यूरोप में स्थाई नागरिकता ले लेना चाहते हैं.

उनमें कई लोग हैं , जो अमेरिका में ही बस जाना चाहते हैं. अमीर लोग कानूनी रास्ते से अमेरिका में दाखिल होते हैं.

गरीब लोगों की भी हसरतें होती हैं. और वह भी पश्चिम की दुनिया के आकर्षण में दाखिल होना चाहते हैं . इनमें से कुछ लोग इन देशों में दाखिल भी होते हैं.

गुजरात के लोग या पंजाब के लोग अमेरिका जाते हैं. परंतु बिहार जैसे प्रांत से भी लोग अमेरिका जाने की कोशिश में रहते हैं

आजकल मुंबईया फिल्मों में पश्चिमी देशों की लुभावन तस्वीर दिखलाई जाती है.

फिल्मों की शूटिंग भी पश्चिमी देश में की जाती है. फिल्मों से भी गलत किस्म का आकर्षण बन रहा है.
अब दिल चाहता है जैसे फिल्मों के पीछे का का आधा सत्य उजागर होने लगा है.

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