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पूर्व IPS अमिताभ दास गिरफ्तार: NEET छात्रा बलात्कार केस में CM के बेटे पर उठाए सवाल

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पटना की चर्चित NEET छात्रा मौत और संभावित बलात्कार मामले ने अब नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। इस केस में पुलिस अब तक 30 से अधिक लोगों के डीएनए सैंपल ले चुकी है, जिसमें छात्रा के परिवार के सदस्य, उसके ड्राइवर और उसकी मां तक शामिल हैं। पुलिस का तर्क है कि वैज्ञानिक तरीके से जांच आगे बढ़ाने के लिए इतने बड़े पैमाने पर डीएनए परीक्षण जरूरी थे।

इसी बीच, पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ दास शुरू से ही यह दावा करते रहे हैं कि इस मामले की जांच में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की भूमिका की भी पड़ताल होनी चाहिए। दास का आरोप है कि रेप केस में निशांत के खिलाफ उनके पास कुछ प्रमाण हैं, जिनके आधार पर उनका डीएनए मिलान करवाना चाहिए। उनका कहना है कि जिस तरह 30 लोगों का डीएनए टेस्ट कराया गया, उसी तरह पारदर्शिता के लिए निशांत का सैंपल भी सार्वजनिक रूप से देना चाहिए था।

छात्रा हत्या व कथित बलात्कार मामले से जुड़े सबूत सौंपने वाले थे

अमिताभ दास का कहना है कि वे सोमवार को दिल्ली जाकर CBI डायरेक्टर से मिलने वाले थे और NEET छात्रा हत्या व कथित बलात्कार मामले से जुड़े अपने सबूत सौंपने वाले थे। लेकिन इससे पहले ही पटना पुलिस हरकत में आ गई। नाटकीय ढंग से उनके अपार्टमेंट पर छापेमारी हुई, उन्हें हिरासत में लिया गया और मेडिकल जांच के बहाने पहले रुबान अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद औपचारिक रूप से उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि हुई।

गिरफ्तारी के वक्त जब अमिताभ दास अपने अपार्टमेंट से बाहर निकले तो मीडिया ने उन्हें घेर लिया। कैमरों के सामने उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके घर में “कुछ‑कुछ रख दिया है” और यह भी कहा कि उनकी गिरफ्तारी ठीक उसी समय की गई, जब वे CBI को सबूत सौंपने की तैयारी में थे। सोशल मीडिया पर भी उनका नाम तब सुर्खियों में आया, जब उन्होंने अपनी एक तस्वीर के साथ ऐसा पोस्ट किया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की गई थी कि वे कथित “Epstein files” मामले में प्रधानमंत्री को बर्खास्त करें।

राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या NEET छात्रा केस की जांच वास्तव में वैज्ञानिक और निष्पक्ष दिशा में आगे बढ़ रही है, या फिर डीएनए जांच और बयानबाजी की यह जंग, राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का नया चेहरा बन चुकी है। एक तरफ पुलिस दावा कर रही है कि वह हर एंगल से जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अमिताभ दास जैसे पूर्व अफसर खुलकर यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या सत्ता के सबसे करीब बैठे लोगों की भी उसी तरह जांच होगी, जैसे आम लोगों की हो रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। NEET छात्रा के परिवार को न्याय मिलेगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में CBI जांच, अदालत की सुनवाई और डीएनए रिपोर्ट्स पर निर्भर करेगा। फिलहाल, बिहार की राजनीति और प्रशासन दोनों इस संवेदनशील मामले में कठघरे में नजर आ रहे हैं।

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