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Unnao rape case मामले में निर्भया की मां ने कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने पर जानिए क्या कहा
उत्तर प्रदेश के 2017 के उन्नाव रेप केस (Unnao rape case) मामले में सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है। अदालत ने उसकी उम्रकैद की सजा पर भी रोक लगा दी है। इस पर निर्भया की मां, आशा देवी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह एक नया नियम स्थापित किया जा रहा है। जेल में बंद अन्य लोग भी यह कहेंगे कि चूंकि उन्हें फांसी की सजा मिली थी, इसलिए उनकी भी सुनवाई दोबारा की जानी चाहिए। यह स्थिति स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। अदालत अपने आप में इस मामले को मजाक बना रही है।
अदालत को निष्पक्ष सुनवाई करनी चाहिए
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “मुझे नहीं पता यह सब कहाँ से उत्पन्न हो रहा है। चाहे आप 500 किलोमीटर दूर क्यों न हों या अपने घर पर, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। असल में, फर्क इस बात से पड़ता है कि आपने अपराध किया है और आपको सजा दी गई है। दोनों पक्षों को अपील करने का अधिकार है। अदालत को पीड़ित की स्थिति और उसके साथ हुए घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष सुनवाई करनी चाहिए। बेल नहीं दी जानी चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “जो भी अपील की गई है, उसकी सुनवाई की जानी चाहिए और उनकी सजा को बनाए रखा जाना चाहिए, क्योंकि उस परिवार के लिए अभी भी खतरा बना हुआ है। उनके भाई ने कहा कि हमारी तीन छोटी बच्चियां हैं, जिन्हें हम स्कूल नहीं भेज सकते। हमें सुरक्षा के कारण घर के अंदर ही रहना पड़ रहा है, और हम काम भी नहीं कर सकते। यदि वह व्यक्ति बाहर आ गया तो हमारा क्या होगा? हम अदालत, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से अपील करते हैं कि उन्हें जमानत न दी जाए।”
कोर्ट की सुनवाई का गलत तरीका
निर्भया की माता ने यह भी कहा, “कोर्ट जो भी सुनवाई का तरीका अपना रहा है, जैसे कि अलग-अलग सुनवाई का प्रावधान, ऐसा कोई नियम नहीं बनाना चाहिए। इससे गलत संदेश जाएगा। मैं इसे स्वीकार नहीं करती, यह बिलकुल भी उचित नहीं होना चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि एक नया नियम बनाया जा रहा है जो उन्हें राहत प्रदान कर रहा है। या तो निचली अदालतों की सुनवाई ही मत कीजिए, सभी मामलों की अपील सीधे हाई कोर्ट में करें। कई बार ऐसा देखा गया है कि निचली अदालत और हाई कोर्ट ने फांसी की सज़ा दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बाद में उन्हें छोड़ दिया। तो फिर आप सीधी सुनवाई कीजिए।”
आशा देवी ने कहा, ”आप लोग लोअर कोर्ट और हाई कोर्ट में समय क्यों बर्बाद कर रहे हैं? ऐसा फैसला लेना अदालत के लिए कैसे संभव है? कोर्ट की प्रक्रिया एक मजाक बनती जा रही है। इलाज के लिए कोर्ट जाना ठीक है, लेकिन जेल में इलाज कराना होगा। जेल के अधिकारी आपके आंख के ऑपरेशन का कैसे प्रबंध करेंगे? यह सब वास्तव में उन्हें रिहा करने का एक बहाना लगता है। अगर किसी को सर्जरी या चिकित्सा की जरूरत है, तो उन्हें जेल में अपील करनी चाहिए और पूरी चिकित्सा मिलनी चाहिए, लेकिन जमानत नहीं दी जानी चाहिए।”
दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को स्थगित कर दिया
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2017 के उन्नाव रेप मामले में आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर की सजा को स्थगित कर दिया है। इस पर पीड़िता की बहन ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “मैं इस निर्णय से खुश नहीं हूं। उसने मेरे मामा को मारा और फिर मेरे पिता की भी हत्या कर दी। अब मेरी बहन के साथ जो हुआ, उसकी वजह से हम अभी भी खतरे में हैं।”
दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत दे दी है, जबकि उसकी उम्रकैद की सजा पर रोक लगाई है। 2017 में एक नाबालिग लड़की ने कुलदीप सेंगर पर अपहरण और बलात्कार का आरोप लगाया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले में सेंगर की स्थिति पर विचार किया गया।
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