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Jamshedpur: आदि कुड़मालि बछरकि माड़ा +0007 कैलेंडर 2026 का भव्य विमोचन, कुड़मि समाज की सांस्कृतिक विरासत को मिली नई पहचान
जमशेदपुर (Jamshedpur), 25 जनवरी 2026: करम आखड़ा, बालिगूमा (डिमना), मानगो स्थित जमशेदपुर में रविवार को आदि कुड़मालि बछरकि माड़ा +0007 (2026–27) कैलेंडर का विधिवत विमोचन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कैलेंडर कुड़मालि समाज की प्राचीन लोक परंपराओं, स्वदेशी समय गणना और लोकधारणाओं को संरक्षित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
कुड़मालि कैलेंडर 2026: पुरखा विरासत का पुनरुद्धार
कुड़मालि कैलेंडर 2026 न केवल एक तारीखी दस्तावेज है, बल्कि कुड़मि समाज की सांस्कृतिक चेतना और आत्म-पहचान को मजबूत करने वाला माध्यम है। रचयिता सारिआन काड़ुआर ने इसे समाज की जड़ों से जोड़ने का प्रयास बताया है। समारोह में दिलीप काड़ुआर (एडवोकेट), सुनील गुलियार, दीपक रंजीत, विवेक कुमार सिंह, मदन मोहन सोरेन, सुबोध गौड़, देवाशीष मुतरुआर, सुभाष हिंदइआर और सागर पाल जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।वक्ताओं ने इसे कुड़मालि संस्कृति के संरक्षण और भावी पीढ़ियों तक ज्ञान पहुंचाने की अनूठी उपलब्धि करार दिया।
सारिआन काड़ुआर का विशेष बयान
कैलेंडर रचयिता सारिआन काड़ुआर ने कहा,“आज ‘आदि कुड़मालि बछरकि माड़ा +0007’ कैलेंडर का विमोचन हमारे समाज के लिए केवल एक दस्तावेज़ का प्रकाशन नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान, स्वदेशी ज्ञान और पुरखा परंपरा का पुनरुद्धार है। हमारी लोकधारणा, समय-गणना और सामाजिक मूल्य सदियों से चली आ रही हैं, और इस कैलेंडर के माध्यम से हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक मजबूती भरा कदम उठा रहे हैं।
यह प्रयास केवल एक सामुदायिक दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि हमारी चेतना, हमारी धरोहर और हमारी आत्म-पहचान की अभिव्यक्ति है। मैं उन सभी के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने इस पहल में अपना समय, ऊर्जा और समर्थन दिया।”
समारोह की झलकियां और महत्व
कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ, जिसे कुड़मि समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। उपस्थित सभी ने जमशेदपुर कुड़मालि कैलेंडर विमोचन को सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक बताया।
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