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जमशेदपुर में जलेस की वासंती काव्य संध्या, कविता-ग़ज़लों में झलके समय के सवाल
वसंत की भावनाओं के साथ समकालीन संकटों, युद्ध और सामाजिक प्रश्नों पर कवियों की मुखर अभिव्यक्ति

जनवादी लेखक संघ (जलेस), सिंहभूम इकाई द्वारा संध्या 04:00 बजे पेंशनर समाज, साकची पुराना कोर्ट परिसर में वासंती काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवियों और शायरों ने वसंत की भावनाओं के साथ-साथ समकालीन सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय प्रश्नों को अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
मंच पर शैलेन्द्र अस्थाना, राजदेव सिन्हा, सुरेश दत्त पाण्डेय एवं डॉ. उदय प्रताप हृयात उपस्थित थे। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. लता मानकर ने शब्द-सुमनों से अतिथियों और उपस्थित कवियों का स्वागत किया।
कविता और शायरी में समकालीन सरोकारों की अभिव्यक्ति

कवि गोष्ठी की शुरुआत अनमोल की कविता “हमारा प्यारा नया भारत” से हुई। इसके बाद अनुभव सिंह, आशुतोष चौबे, आलोक तिवारी, पंकज प्रभात, सुजल एवं नम्रिता जैसे युवा कवियों ने अपनी रचनाओं में वासंती संवेदनाओं के साथ वैश्विक संकट, युद्ध की विभीषिका, बेरोजगारी, धार्मिक उन्माद, कट्टरवाद तथा बदलते मानवीय संबंधों की पीड़ा को अभिव्यक्त किया। कवियों ने प्रश्न उठाया कि क्या वास्तव में आज का विश्व 21वीं सदी का और मनुष्यता का पक्षधर है?
शेरो-शायरी ने बाँधा समां
युवा शायर संजय सोलोमन ने अपने शेर —
“जैसे सहरा में वसंत का आना क्या चल जाना क्या,
बस वैसे ही बेमानी है मेरा जौबन तेरे बिन।”
से श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरीं। वहीं मायानगरी मुंबई में अपनी पहचान बना चुके युवा शायर विश्वदीप जिस्त ने अपने शेर —
“आओ मजहब-मजहब खेलें और हराएँ इंसां को,
फिरके-खेमे-जात बनाएँ और मिटाएँ इंसां को।”
से महफ़िल में नई ऊर्जा भर दी।
विविध विधाओं में कवियों की प्रभावशाली प्रस्तुति
शेरो-शायरी, नज़्म, गीत-ग़ज़ल और कविता के इस दौर में साबिर नवादवी, असर भागलपुरी, डॉ. उदय प्रताप हृयात, विमल किशोर विमल, वीणा कुमारी, सरिता सिंह, सतीश कुमार, कैलाशनाथ शर्मा गाजीपुरी, रमेश हंसमुख, जयप्रकाश पाण्डेय, प्रियंका सिंह, रीना सिन्हा सलोनी, सुनीता सोहनी, अजय मुस्कान, श्रवण तथा वरुण प्रभात सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक और मानवीय प्रश्नों को स्वर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ज्योत्सना अस्थाना ने की, जबकि संचालन डॉ. लता मानकर ने किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन वरुण प्रभात ने किया।
सामूहिक सहयोग से सफल हुआ आयोजन
कार्यक्रम को सफल बनाने में एस.पी. सिंह, अर्पिता, जे.जे. प्रसाद, सीता सिंह, धीरेन्द्र प्रसाद सिंह सहित अनेक साथियों का विशेष योगदान रहा।
