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Treasury scam: jharkhand में ‘चारा घोटाले’ की यादें ताजा! करोड़ों के गबन के बाद जांच के घेरे में कई बड़े अधिकारी
Treasury scam in Jharkhand: 90 के दशक में अविभाजित बिहार में हुए चारा घोटाले में विभिन्न कोषागारों से करोड़ों रुपये निकालकर उनका बंटवारा किया गया था। अब इसी तरह का एक गंभीर मामला झारखंड में उभर कर सामने आया है, जहां दो अलग-अलग कोषागारों से करोड़ों रुपए की फर्जी निकासी की गई है। बोकारो ट्रेजरी से 4.30 करोड़ और हजारीबाग कोषागार से लगभग 15 करोड़ की अवैध निकासी का मामला सामने आने के पश्चात, राज्य सरकार ने सभी 33 ट्रेजरी और सब-ट्रेजरी में एक विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
अवैध निकासी की राशि 50 करोड़ रुपये
संभावना जताई जा रही है कि अवैध निकासी की राशि 50 करोड़ रुपये या इससे भी अधिक हो सकती है। प्रारंभ में, बोकारो ट्रेजरी से एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी के नाम पर 4 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी का मामला उजागर हुआ।
जांच में पता चला है कि जुलाई 2016 में सेवानिवृत्त हुए उपेंद्र सिंह को फर्जी तरीके से सेवा में दर्शाया गया। इसके परिणामस्वरूप, नवंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच 25 महीनों में 63 बार उनका वेतन निकाला गया। इस मामले में एसपी के कार्यालय के अकाउंटेंट कौशल किशोर पांडेय को गिरफ्तार किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने डीडीओ स्तर के बिल प्रबंधन प्रणाली में छेड़छाड़ करके नकली वेतन बिल तैयार किए। जांच में यह भी पाया गया है कि पहले उसने अपने बैंक खाते में पैसे जमा किए, उसके बाद उसने अपनी पत्नी अनु पांडेय के खाते का सहारा लिया। दोनों खातों में जमा की गई बड़ी राशि को रोक दिया गया है। झारखंड में इस घोटाले से हड़कंप मच गया है।
प्रारंभिक जांच के अंतर्गत कई खातें फ्रिज
बोकारो के बाद हजारीबाग ट्रेजरी में भी 15 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध निकासी की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जांच के अंतर्गत कई खातों को फ्रीज कर दिया गया है और विस्तार से जांच का काम जारी है। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने इन मामलों की पुष्टि करते हुए इसे ट्रेजरी और प्रशासनिक निगरानी की कमी का मामला बताया। उन्होंने कहा कि सभी जिलों के उपायुक्तों और संबंधित अधिकारियों को ट्रेजरी की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। बोकारो प्रकरण के खुलासे के बाद राज्यभर में पुलिस अधीक्षकों को सतर्क किया गया, जिसके नतीजे में विभिन्न जिलों में ऑडिट का कार्य शुरू किया गया। इसी तरह का एक मामला यह 90 के दशक की बात है, जब जानवरों के चारे के नाम पर धोखाधड़ी करके करोड़ों रुपये हड़प लिए गए थे। उसी समय, ज्यादातर झारखंड की ट्रेजरी से बिहार के चर्चित चारा घोटाले का पर्दाफाश हुआ था।
बोकारो में हाल के मामले के बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए दो सहायक लेखापालों को हटाया है और अप्रैल महीने के बिलों के भुगतान पर रोक लगा दी है। उपायुक्त ने वित्तीय अनुशासन को सख्त करने का निर्देश दिया है। इसी तरह, हजारीबाग में उपायुक्त ने इस मुद्दे की जांच के लिए एक टीम का निर्माण किया है। वहाँ कुछ व्यक्तियों को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। लगातार आ रही रिपोर्टों के चलते यह आशंका जताई जा रही है कि जांच के आगे बढ़ने पर और भी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
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