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काम की Legal guarantee तय, राज्य सरकार को 125 दिन बाद unemployment allowance देना बाध्य
विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025 (वीबीजी-रामजी) अब मनरेगा की जगह लेने वाली नई प्रणाली है। इस पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को पूरे राज्य की पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया।
इस अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों को सालाना 125 दिनों की मजदूरी देने की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। यदि निर्धारित अवधि में कार्य उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो राज्य सरकार निर्धारित दर और शर्तों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता देने के लिए जिम्मेदार होगी।
ग्राम पंचायत योजना (वीजीपीपी) के अंतर्गत कार्यों की योजना ग्राम पंचायतों द्वारा विकसित की जाएगी और इसे पीएम-गति शक्ति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्थानिक योजना प्रणालियों में एकीकृत किया जाएगा।
श्रमिकों का पंजीकरण और ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड भी ग्राम पंचायतों के माध्यम से तैयार किए जाएंगे। कार्यों की प्राथमिकता को देखते हुए, ग्राम पंचायतें कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार रहेंगी। प्रखंड स्तर पर योजनाओं का निर्माण पंचायत समितियों द्वारा किया जाएगा।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण और स्पैटियल तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
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