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मानगो चुनाव 2026: सरयू राय के 20,000 वोट अंतर दावे की असलियत, मुस्लिम वोट और गैर-मुस्लिम मजबूती का गणित
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने मानगो क्षेत्र के विधानसभा और मेयर चुनावों में NDA और कांग्रेस के बीच लगभग 20,000 वोट के स्थायी अंतर का दावा किया है। उन्होंने इसे राजनीतिक संकेत बताया, जहां दोनों चुनावों में वोट गैप समान रहा। लेकिन आंकड़ों की गहराई में झांकें तो सामाजिक परतें इस अंतर को बदलती तस्वीर देती हैं।
मुस्लिम वोट में उछाल
पिछले विधानसभा चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवारों को औसतन 8,000 वोट ही मिलते थे, लेकिन 2026 मेयर चुनाव में जेबा खान को करीब 11,000 और जेबा कादरी को 3,000 वोट मिले। कुल 14,000 मुस्लिम वोटों ने पैटर्न तोड़ा, जो मतदाताओं की बढ़ती सक्रियता दिखाता है। हालांकि वोट बंटवारे से कुल प्रभाव सीमित रहा।
गैर-मुस्लिम क्षेत्रों में कांग्रेस की मजबूती
मानगो के गैर-मुस्लिम इलाकों में कांग्रेस को परंपरागत रूप से कमजोर माना जाता था, लेकिन बन्ना गुप्ता और सुधा गुप्ता को कई बूथों पर अप्रत्याशित समर्थन मिला। सुधा गुप्ता ने मेयर चुनाव में कभी पीछे नहीं हारीं और 18,601 वोटों से जीत दर्ज की। यह स्थिर आधार NDA के कोर वोट को चुनौती देता है।
20,000 वोट अंतर की हकीकत
सरयू राय के अनुसार अंतर स्थायी है, लेकिन मुस्लिम वोटों की 8,000 से 14,000 की छलांग और गैर-मुस्लिम क्षेत्रों में कांग्रेस की मजबूती इसे संतुलित समीकरण बनाती है। दोनों पक्षों के कोर वोट बैंक मजबूत हैं, इसलिए गैप समान रहा। मेयर चुनाव में सुधा को 42,022 वोट मिले, जबकि NDA की संध्या सिंह को 23,421।
बदलते चुनावी गणित का सबक
आंकड़े बताते हैं कि मानगो का चुनाव सिर्फ कुल अंतर नहीं, बल्कि सामाजिक धाराओं का खेल है। सरयू राय का विश्लेषण सतही सही लगता है, लेकिन भीतरी परिवर्तन भविष्य के संकेत देते हैं। राजनीति में वोट बैंक की गतिशीलता ही असल कहानी कहती है।
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