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NEET छात्रा Murder Case: 11 दिन बाद CBI जांच पर सस्पेंस, रोहिणी आचार्य का पुलिस पर तीखा हमला

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NEET Student Murder Case: पटना के मुन्ना चक में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मचा दी है। जांच की गति, विभिन्न एजेंसियों की भूमिका और सच सामने लाने में हो रही देरी पर सवाल उठने लगे हैं। इस संदर्भ में, लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में राज्य सरकार और पुलिस की तीखी आलोचना की है।

जांच की गुणवत्ता पर सवाल

उन्होंने यह सवाल उठाया कि इतने समय के बीत जाने के बाद भी न तो दोषियों की पहचान हो सकी है और न ही केंद्रीय एजेंसी ने औपचारिक रूप से जांच अपने हाथ में ली है। ऐसे में चल रही जांच की गुणवत्ता पर सवाल उठता है।

रोहिणी ने अपने सोशल मीडिया पर यह लिखा, “क्या अनुसंधान और जांच कर रही है SIT और बिहार पुलिस? इस गंभीर और संवेदनशील मामले में बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, और इस बार भी पूरी जांच और पूछताछ की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है।”

रोहिणी ने आगे कहा, “सरकार, सत्ताधारी पार्टी और पुलिस के पास जांच पर कुछ भी ठोस कहने के लिए नहीं है। CBI जांच की सिफारिश के ग्यारह दिन बाद भी यदि CBI ने जांच अपने हाथ में नहीं ली, तो यह दर्शाता है कि सरकार की ओर से बड़े लोगों को बचाने और मामले को दबाने की कोशिशें हो रही हैं।”

तीन संदिग्धों के नमूने लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए

वहीं, SIT अपनी जांच को आगे बढ़ाने का दावा कर रही है। अब तक कई लोगों के सैंपल एकत्रित किए जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार, 25 परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी हैं, लेकिन ये घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों के अनुरूप नहीं हैं। हाल ही में जहानाबाद से तीन संदिग्धों के नमूने लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। टीम अब नई रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रही है। जांच अधिकारी का मानना है कि डीएनए मिलान इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। हालांकि, बार-बार नेगेटिव रिपोर्ट आ जाने से स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

इस बीच, SIT के कार्यों पर भी सवाल उठने लगे हैं। टीम रात के समय गांव पहुंची और परिजनों को नोटिस सौंपने का प्रयास किया, जिससे स्थानीय निवासियों में असंतोष उत्पन्न हो गया। परिवार का आरोप है कि जब सरकार ने सार्वजनिक रूप से CBI जांच की घोषणा की है, तब भी पुलिस उन पर दबाव डाल रही है। हालांकि, अधिकारियों का यह कहना है कि जब तक CBI औपचारिक रूप से जिम्मेदारी नहीं ले लेती, तब तक राज्य पुलिस को प्रक्रिया को आगे बढ़ाना आवश्यक है।

छात्राओं का सामान पुलिस की निगरानी में वापस लौटाया गया

जहां यह घटना घटी थी, उस गर्ल्स हॉस्टल को पहले ही सील किया जा चुका है। न्यायालय के आदेश के तहत, छात्राओं का सामान पुलिस की निगरानी में वापस लौटाया गया। सामान लौटाने के बाद, इमारत को फिर से बंद कर दिया गया। यह कदम भी जांच का एक हिस्सा बताया जा रहा है, ताकि साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके।

राज्य सरकार ने जनवरी के अंतिम सप्ताह में केंद्रीय जांच की सिफारिश की थी। विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी केस डायरी, गवाहों के बयान, डिजिटल डेटा और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर लिए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि जैसे ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा, संबंधित सभी रिकॉर्ड सौंप दिए जाएंगे। लेकिन इस प्रक्रिया में हो रही देरी ने राजनीतिक विवादों को और बढ़ा दिया है।

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