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NTPC प्लांट की लापरवाही का दुष्परिणाम, रासायनिक पानी से सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद
पटना जिले के एनटीपीसी (NTPC) प्लांट से निकलने वाले पानी के कारण सैकड़ों बीघा में तैयार धान की फसल बर्बाद हो गई है। इस स्थिति में किसान अपनी फसल को काटकर खाट पर रखते हैं और फिर उसे घर वापस ले जाते हैं। कई बीघा में धान की फसल बर्बाद होने के साथ-साथ लगभग पचास एकड़ में दलहन की फसल भी डूब गई है। किसानों को भीषण ठंड के दौरान घुटने भर पानी में घुसकर फसल काटनी पड़ रही है, जिसके चलते कई किसान बीमार भी पड़ चुके हैं। एनटीपीसी प्लांट की लापरवाही का दुष्परिणाम किसान भुगत रहे हैं, और फिर भी एनटीपीसी पीड़ित किसानों को मुआवजे के नाम पर एक भी पैसा देना उचित नहीं समझती है।
लापरवाही का दुष्परिणाम: सात वर्षों से यह समस्या लगातार
इस मुद्दे पर प्रभावित किसान बताते हैं कि लगभग सात वर्षों से यह समस्या लगातार बनी हुई है। फसल तैयार करने या काटने के समय केमिकल युक्त पानी के संपर्क में आने से उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ और पैरों में तकलीफ होती है। हाल ही में, दो किसान खाट के सहारे दो कट्ठा फसल काटने के बाद बीमार पड़ गए, जिससे अन्य किसान भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि 15-20 मिनट तक पानी में धान काटने के बाद उन पर ठंड का असर पड़ जाता है, जिससे कई किसान बीमार हो चुके हैं।
इस केमिकल मिश्रित रिसाइकल पानी के प्रभाव से भूमि धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है। कुछ सक्षम किसान ही फसल की कटाई कर पाने में सफल हो रहे हैं, जबकि शेष अस्सी प्रतिशत फसल बर्बाद हो रही है। इसके अलावा, लगभग अस्सी प्रतिशत से अधिक किसानों की फसल भी प्रभावित हुई है।
पीआरओ का सवालों के जवाब देने में टालमटोल
इस मुद्दे पर एनटीपीसी के पीआरओ विकास धर द्विवेदी ने बताया कि किसानों की समस्याओं को देखने के लिए एक जांच टीम बनाई गई है, लेकिन अब तक पानी निकलने वाले स्थान का पता नहीं चल पाया है। वे कई सवालों के जवाब देने में टालमटोल करते रहे हैं।
ढीबर, सहनौरा, रैली ईंग्लिश, लक्ष्मीपुर, और बरियारपुर मौजाओं के किसान अपने खेतों की देखभाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि पानी की निकासी के लिए रेल की पटरी के पास एक पाईप बनाया गया था, लेकिन एनटीपीसी ने डंप में पाइप ले जाने के कारण इसे बाधित कर दिया। किसानों ने पिछले सोमवार को इस मामले की लिखित शिकायत एनटीपीसी के अधिकारियों और पंडारक के सीओ से की है। उनकी मांग है कि एनटीपीसी से निकलने वाले रासायनिक पानी को किसी अन्य जगह प्रवाहित किया जाए और साथ ही उन्हें होने वाले नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
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