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Nitish government का नया प्लान, बिहार की सड़कों की होगी AI से जांच; सड़कों की निगरानी के लिए लगाए जाएंगे क्यूआर कोड

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नीतीश सरकार (Nitish government) नया प्लान लेकर आ गयी है। अगर आपके गांव की सड़कें ठीक नहीं हैं, तो अब इसकी शिकायत दबाई नहीं जाएगी। बिहार सरकार ने ग्रामीण सड़कों की निगरानी के लिए एक नया तरीका लागू किया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनाई गई सड़कों पर अब क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। यदि सड़क खराब पाई जाती है, तो ठेकेदार, इंजीनियर और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रावधान होगा।

सड़क किनारे लगे बोर्डों पर क्यूआर कोड अंकित होगा

इस नई प्रणाली में अब आम नागरिकों को भी निगरानी करने का मौका मिलेगा। सड़क किनारे लगे बोर्डों पर क्यूआर कोड अंकित होगा, जिसे कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से स्कैन कर सकता है। जैसे ही वह कोड स्कैन करेगा, उस सड़क की सारी जानकारी उसे प्राप्त हो जाएगी। यदि सड़क पर गड्ढा है या कोई निर्माण कार्य में कमी है, तो उपयोगकर्ता उसकी तस्वीर खींचकर सीधे संबंधित विभाग को भेज सकता है।

एक विशेष पहलू यह है कि जो भी तस्वीरें लोग भेजेंगे, उनका विश्लेषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा किया जाएगा। यह प्रक्रिया शिकायतों की जांच को और अधिक तीव्र एवं प्रभावी बनाएगी। इस तरह से फर्जी शिकायतों पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा, और जब सही शिकायतें सामने आएंगी, तो उनके निपटारे में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गया जिले में सबसे अधिक क्यूआर कोड

वर्तमान में यह प्रणाली बिहार के 23 जिलों में कार्यान्वित हो चुकी है। इसकी शुरुआत सीवान, सुपौल, जमुई, गया और मुंगेर जैसे जिलों से हुई थी। अब इसे अन्य जिलों में भी फैलाया जा रहा है, और शेष 15 जिलों में भी जल्द ही क्यूआर कोड की निगरानी स्थापना की जाएगी।

गया जिले में सबसे अधिक क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जहां 74 सड़कों पर यह व्यवस्था मौजूद है। कटिहार में 60, मधेपुरा में 59, औरंगाबाद में 54, समस्तीपुर में 39, और रोहतास में 25 सड़कों पर यह प्रणाली लागू है। इसके अलावा, पटना और दरभंगा में भी 19-19 सड़कों पर क्यूआर कोड स्थापित किए गए हैं।

नई व्यवस्था से पारदर्शिता में वृद्धि

ग्रामीण कार्य विभाग ने सभी जिलों के इंजीनियरों को निर्देशित किया है कि सभी सड़कों पर रखरखाव से संबंधित सूचना बोर्ड लगाना आवश्यक है। इन बोर्डों पर ई-मार्ग पोर्टल के माध्यम से उत्पन्न किया गया क्यूआर कोड भी चिपकाया जाएगा।

सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता में वृद्धि होगी और सड़कों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी। अगर गांव की किसी सड़क में खराबी आती है, तो जिम्मेदार लोग बच नहीं पाएंगे। अब आम जनता भी सड़कों की निगरानी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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