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पहली बार सिर्फ 7 दिन के लिए बने थे CM, अब राज्यसभा की तैयारी; देखें नीतीश कुमार का पूरा राजनीतिक सफर

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बिहार की राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन की आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार 5 जून को राज्यसभा के लिए अपने नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि वह गुरुवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ मिलकर अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ, तो इसे राज्य के राजनीति में बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जायेगा।

नीतीश कुमार की दसवीं बार शपथ

करीब चार महीने पहले, 20 नवंबर को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद पर अपने कार्यकाल की दसवीं बार शपथ ली। अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत उन्होंने साल 2000 में मुख्यमंत्री के रूप में की थी, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के कारण उन्हें सिर्फ सात दिन में इस्तीफा देना पड़ा।

इसके बाद, 2005 में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल की सत्ता को कड़ी चुनौती देते हुए भारी बहुमत से दोबारा सरकार बनाई। इस समय से उनकी अच्छे शासन की छवि मजबूत होने लगी।

2014 में बीजेपी से अपने संबंध तोड़ लिए

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले, जब भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया, नीतीश कुमार ने बीजेपी से अपने संबंध तोड़ लिए और एनडी गठबंधन को छोड़ दिये।

चुनाव में भारी हार के बाद उन्होंने नैतिकता का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री पद से अपने इस्तीफे की घोषणा की। इसके बाद जीतेनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन सत्तारूढ़ विवादों के कारण उन्हें अपने पद से हटना पड़ा। फरवरी 2015 में नीतीश कुमार ने एक बार फिर मुख्यमंत्री के रूप में वापसी की।

2015 में लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन

2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन किया और महागठबंधन सरकार का गठन किया। इस सरकार में तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री के रूप में चुना गया।

हालांकि, लालू-नीतीश का गठबंधन ज्यादा समय तक चल नहीं सका और 2017 में नीतीश कुमार ने फिर से अपनी रणनीति में बदलाव किया। उन्होंने महागठबंधन को तोड़ते हुए फिर से एनडीए का दामन थाम लिया।

नीतीश कुमार ने 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ मिलकर एनडीए के नेता के रूप में मुख्यमंत्री के पद पर वापसी की। लेकिन 2022 में उन्होंने एनडीए को छोड़कर महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बनाई।

2024 में एनडीए में वापसी

हालांकि, जनवरी 2024 में उन्होंने फिर से महागठबंधन से संबंध तोड़ते हुए एनडीए में वापसी की और नौवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद, विधानसभा चुनाव 2025 तक उन्होंने कई अवसरों पर यह स्पष्ट किया कि इस बार वह अपना राजनीतिक रुख नहीं बदलेंगे।

पिछले चार महीनों में, नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए ने राज्य में ऐतिहासिक जीत हासिल की, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री का पद संभाला। इस चुनाव में एनडीए ने महागठबंधन को हाशिये पर ला खड़ा कर दिया है।

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