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जीवन दर्शन

दुनिया एक सर्कस है: बूढ़े बादल, नशे और जिंदगी पर डॉ. योगेन्द्र की नजर

दुनिया एक सर्कस है सवा चार बजे जग गया था। दरवाज़े खोले मैंने। आसमान साफ साफ दिखाई नहीं दे रहा था। सड़क पर अँधेरे और प्रकाश का मिलाजुला…

रांची की बारिश से बचपन की यादों तक: मुड़ मुड़ कर न देख | डॉ. योगेन्द्र

रांची की बारिश से बचपन की यादों तक: राँची रेलवे स्टेशन पर जब कल उतरा तो बारिश की बूँदों की लहक से मुलाक़ात हुई। भागलपुर में बादल लगभग…

शब्दों का विस्फोट और चुप्पियों की तलाश | आधुनिक जीवन, प्रकृति और मनुष्य पर गहन विचार

शब्दों का विस्फोट और चुप्पियों की तलाश: आकाश बादलों से भरा। लगता था कि अब बारिश होगी कि तब बारिश होगी। बारिश के डर से छाता भी रख लिया गया।…