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जीवन दर्शन

रांची की बारिश से बचपन की यादों तक: मुड़ मुड़ कर न देख | डॉ. योगेन्द्र

रांची की बारिश से बचपन की यादों तक: राँची रेलवे स्टेशन पर जब कल उतरा तो बारिश की बूँदों की लहक से मुलाक़ात हुई। भागलपुर में बादल लगभग

शब्दों का विस्फोट और चुप्पियों की तलाश | आधुनिक जीवन, प्रकृति और मनुष्य पर गहन विचार

शब्दों का विस्फोट और चुप्पियों की तलाश: आकाश बादलों से भरा। लगता था कि अब बारिश होगी कि तब बारिश होगी। बारिश के डर से छाता भी रख लिया गया।