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वक्फ संशोधन विधेयक 2024 एक महत्वपूर्ण कानूनी सुधार है, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार करना और इससे जुड़े विवादों को हल करना है। यह विधेयक वक्फ अधिनियम 1995 में किए गए कुछ महत्वपूर्ण संशोधनों पर आधारित है, जिनका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।
प्रमुख सुधार:
- वक्फ से ट्रस्टों का पृथक्करण:
- विधेयक के अनुसार, मुसलमानों द्वारा बनाए गए ट्रस्टों को वक्फ संपत्ति के रूप में नहीं माना जाएगा। इससे ट्रस्टों का पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित होगा।
- प्रौद्योगिकी और केंद्रीय पोर्टल:
- एक केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण, ऑडिट, मुकदमेबाजी आदि स्वचालित रूप से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और दक्षता में सुधार होगा।
- वक्फ समर्पण के लिए पात्रता:
- अब केवल वे मुसलमान, जो कम से कम 5 साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं, अपनी संपत्तियों को वक्फ के लिए समर्पित कर सकेंगे।
- पारिवारिक वक्फ में महिलाओं के अधिकार:
- महिलाओं को वक्फ समर्पण से पहले अपनी विरासत का अधिकार मिलेगा। विशेष रूप से विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों के लिए प्रावधान किए गए हैं।
- पारदर्शी वक्फ प्रबंधन:
- मुतवल्लियों को छह महीने के भीतर अपनी संपत्ति का विवरण केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज करना होगा, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी।
- गैर-मुस्लिम प्रतिनिधित्व:
- वक्फ बोर्डों में समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए दो गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त किए जाएंगे।
- सरकारी भूमि और वक्फ विवाद:
- सरकारी संपत्तियों पर वक्फ के दावों की जांच कलेक्टर से ऊपर के अधिकारियों द्वारा की जाएगी, ताकि अनुचित दावों से बचा जा सके।
- वक्फ न्यायाधिकरणों को मजबूत करना:
- एक संरचित चयन प्रक्रिया और निश्चित कार्यकाल के माध्यम से वक्फ न्यायाधिकरणों को स्थिरता और दक्षता मिलेगी।
- मनमाने संपत्ति के दावों को समाप्त करना:
- धारा 40 को हटाया गया है, जिससे वक्फ बोर्ड अब बिना उचित कारण के संपत्तियों को वक्फ घोषित नहीं कर पाएंगे।
हंगामे की वजह:
विधेयक को लेकर विपक्षी दलों का कहना है कि इसमें कुछ प्रावधानों के जरिए वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन के नाम पर अन्य मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। इसके अलावा, वक्फ संपत्तियों से जुड़े कुछ विवाद और कानूनी समस्याओं को हल करने के लिए यह विधेयक लाया गया है, लेकिन इसके प्रावधानों को लेकर कई तरह के राजनीतिक और सामाजिक विवाद उठ रहे हैं।
विपक्षी दलों ने इसे विरोधी दलों की आवाज को दबाने का प्रयास बताया है, और इस वजह से विधेयक पर लोकसभा में तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।