Sen your news articles to publish at [email protected]
Women Reservation: मसीहाई अंदाज में PM मोदी ने महिला आरक्षण अधिनियम लाया। इसके स्वागत का मौका है। इसके लागू होते तीन दशक पूरा हो जाएगा। अंदाजा लगा सकते हैं कि 2029 के संसद में आरक्षित सीट से महिलाएं प्रतिनिधित्व करेंगी।
इसके पहले मोदी ने मसीहाई अंदाज में यह कह दिया कि ईश्वर ने उन्हें इस पवित्र कार्य के निमित्त चुना है।
यह प्रोफेटिक अंदाज मसीहाई या पैगंबराना शैली किसी को पसंद आए भी, फिर भी यह याद रखना जरूरी है कि प्राइवेट बिल के रूप में प्रमिला दंडवत्ते ने यह बिल पहली दफा 1996 लोकसभा में रखा था।
बाद में यह बिल संसदीय समिति को सौंप दिया गया और देशभर में इस पर चर्चा चलाई गई।
महिला आरक्षण बिल, इसके पहले सर्वदलीय नाटक की वजह से 27 वर्षों तक लटक रहा था। दूसरी तरफ महिला आंदोलन के स्वागत का दौर था। जिसमें महिला आरक्षण बिल की मांग होती रही। कोटिश: नारियों ने इस विधेयक को लाने के लिए अब तक अलख जगाए रखा।
प्रत्यक्षतः तो कुछ पार्टियां ही इसके विरोध में आगे आईं. परंतु वस्तुतः भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस बिल को लटकाए रखा । विरोध करने वालों की तरफ से राज्यसभा सदस्य शरद यादव ने इस बिल की प्रति को फाड़ कर, इसे पेश होने से रोक दिया था। शरद यादव के बयान से तो यही लगा कि महिला रिजर्वेशन बिल के बाद पिछड़ी जातियों के कुछ सीट ऊँची जाति की महिलाओं के द्वारा खींच ली जाएगी।
हालांकि दूसरी तरफ पार्टियों के इस चरित्र के बावजूद सोनिया गांधी के जोर लगाने पर महिला आरक्षण बिल राज्यसभा से पारित हुआ है।
पहली बात अब ये देखना है कि राज्यसभा में फिर से किसी बदले रूप में बिल लाया जायेगा या राज्यसभा मे पारित मजमून के आधार पर ही लोकसभा में बिल पेश कर दिया जाएगा।
दूसरी, इस विषय की जांच और समीक्षा दोनों चल रही है, कि क्या संसद और विधानसभाओं में पिछड़ी जातियों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए किसी अलग बिल की आवश्यकता होगी। अगर पिछड़ी जातियों को पहले से आरक्षण होता, या फिर जो बात उठ रही है कि मुसलमान आदि के लिए संसद तथा विधानसभा में कोई अनुपात तय रहता तो महिला विधेयक के अंदर भी उसी तरह का कोटा विभाजित हो जाता। जैसा कि तिहाई महिला सांसदों में दलित महिलाओं का एक हिस्सा अवश्य रहेगा।
इसे कहते हैं कोटा विदिन कोटा।
-
प्रियदर्शी, जानेमाने समाजसेवी और लेखक