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जमशेदपुर की हवा पर डीजल जनरेटरों का ‘जहरीला पहरा’! “मनोज मिश्रा”
टाटा स्टील समेत कई बड़े औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को प्रदूषण बोर्ड का सख्त नोटिस, नियमों की अनदेखी पर ₹25 हजार प्रतिदिन तक पर्यावरणीय मुआवजे का प्रावधान
जमशेदपुर, 28 अक्टूबर 2026: क्या उद्योगों की निर्बाध बिजली के लिए शहर के लोगों की सांसों को दांव पर लगाया जा रहा है? जमशेदपुर में डीजल जनरेटर सेट (DG Set) से होने वाले उत्सर्जन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले डीजल जनरेटरों से निकलने वाले प्रदूषण को लेकर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने सख्त रुख अपनाया है। टाटा स्टील समेत कई बड़े प्रतिष्ठानों से जुड़े इस मामले में प्रदूषण नियंत्रण के निर्देशों और उनके अनुपालन को लेकर नई बहस छिड़ गई है। प्रदुषण बोर्ड ने सभी को नोटिस पकड़ा दिया है।
झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (जेएचआरसी) के केंद्रीय अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने बताया है कि आदित्यपुर स्थित झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने आरटीआई के तहत उपलब्ध कराई गई जानकारी में विभिन्न औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को जारी नोटिसों का विवरण दिया है। इन नोटिसों में डीजी सेटों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए RECD (रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस) लगाने समेत निर्धारित मानकों के अनुपालन का निर्देश दिया गया है।
मनोज मिश्रा के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त आदेशों तथा जमशेदपुर में प्रदूषण के खिलाफ जेएचआरसी के लगातार अभियान के बाद विभाग ने यह कार्रवाई की है।
“इन प्रतिष्ठानों के नाम नोटिस मे, प्रदूषण नियंत्रण के कड़े निर्देश”
जेएचआरसी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, नोटिस प्राप्त करने वाले प्रतिष्ठानों में निम्नलिखित नाम शामिल हैं—
- टाटा स्टील प्रा० लि 0
- टाटा मोटर्स हॉस्पि
- टाटा मेन अस्पताल
- टिनप्लेट अस्पताल
- टीआरएफ
- टाटा पिगमेंट
- एसटीपी लिमिटेड
- शिवा प्लास्टिक, बर्मामाइंस
- होटल साउथ पार्क
- मिथिला मोटर्स
- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड
- टेल्को
“डीजी सेट का धुआं: सेहत के लिए काफ़ी खतरनाक!”
डीजल जनरेटर बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उद्योगों, अस्पतालों और अन्य जरूरी सेवाओं को सहारा देते हैं। लेकिन इनके उत्सर्जन में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5/PM10), नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य प्रदूषक हवा की गुणवत्ता बिगाड़ सकते हैं।
इन प्रदूषकों के संपर्क से सांस संबंधी परेशानी, अस्थमा और हृदय एवं फेफड़ों की बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए खतरा अधिक गंभीर हो सकता है।
“RECD अनिवार्य अनुपालन की दिशा में अहम कदम”
RECD यानी Retrofit Emission Control Device एक ऐसा उपकरण है, जिसे उपयुक्त डीजी सेट में लगाया जा सकता है। प्रमाणित एवं तकनीकी रूप से उपयुक्त उपकरण उत्सर्जित प्रदूषक कणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इनकी प्रभावशीलता उपकरण की तकनीक, क्षमता, रखरखाव और सही संचालन पर निर्भर करती है।
नियमों की अनदेखी पड़ी तो प्रतिदिन ₹25 हजार तक का बोझ!
जेएचआरसी को प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी पत्र में विभिन्न क्षमता वाले डीजी सेटों के लिए कड़े प्रावधानों का उल्लेख है –
नियमों की अनदेखी पड़ी तो प्रतिदिन ₹25 हजार तक का बोझ!
जेएचआरसी को प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी पत्र में विभिन्न क्षमता वाले डीजी सेटों के लिए कड़े प्रावधानों का उल्लेख है—
- पुराने तथा निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं करने वाले कुछ डीजी सेटों के संबंध में स्क्रैपिंग और संचालन पर रोक के प्रावधान बताए गए हैं।
- 41 से 800 किलोवाट तक के निर्धारित डीजी सेटों के लिए RECD अथवा अन्य अनुमत विकल्पों का उल्लेख है।
- 800 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले सेटों के लिए उपयुक्त वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (APCD) अपनाने का प्रावधान बताया गया है।
- नियमों के उल्लंघन पर क्षमता के अनुसार ₹7,500, ₹15,000 और ₹25,000 प्रतिदिन तक पर्यावरणीय मुआवजे (Environmental Compensation) की दरें पत्र में दिए जाने की जानकारी है।
नोटिस में अनुपालन के लिए नोटिस प्राप्ति की तारीख से छह माह (एक सौ अस्सी दिन) की समयसीमा दिए जाने की बात भी सामने आई है।
जेएचआरसी के केंद्रीय अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि “स्वच्छ हवा पाना हर मानव का मौलिक अधिकार है। उद्योग चलें, रोजगार बचें, समाज का आर्थिक एवं सर्वागिण विकास हो, लेकिन आम लोगों की सांसों की कीमत पर नहीं। प्रदूषण नियंत्रण के नियम सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर लागू होने चाहिए।”
