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बांकीपुर Bypoll से पहले Prashant Kishor को बड़ा झटका, प्रो. केसी सिन्हा आज BJP में होंगे शामिल

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बिहार के शिक्षा क्षेत्र के एक प्रमुख हस्ताक्षर और गणितज्ञ प्रो. केसी सिन्हा बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने जा रहे हैं। यह जन सुराज पार्टी और इसके नेता प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है, विशेषकर जब बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव (Bypoll) के सिलसिले में प्रदेश की राजनीति गरमाती जा रही है।

पार्टी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रो. केसी सिन्हा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे।

केसी सिन्हा पटना साइंस कॉलेज में गणित के प्रोफेसर

प्रोफेसर केसी सिन्हा का जन्म बिहार के भोजपुर जिले में हुआ। अपनी प्रारंभिक शिक्षा वहीं प्राप्त करने के बाद, उन्होंने बीएससी और एमएससी किया, जिसमें उन्हें गोल्ड मेडल भी प्राप्त हुआ। इसके पश्चात्, वे पटना साइंस कॉलेज में गणित के प्रोफेसर बने।

प्रो. सिन्हा ने शिक्षा के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान बना ली है, विशेषकर गणित के विषय में उनकी कई पुस्तकें विद्यार्थियों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं।

अब तक, वे लगभग 70 से अधिक किताबें लिख चुके हैं। उनके लेखन का प्रभाव न केवल बिहार, बल्कि अन्य राज्यों के प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले छात्रों पर भी देखा जा सकता है। हाल ही में, विधानसभा चुनावों के पूर्व, उन्होंने जन सुराज में सदस्यता ग्रहण की थी।

वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा

वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रो. केसी सिन्हा ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के टिकट पर पटना की कुम्हरार विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा।

हालांकि, इस चुनाव में उनका प्रदर्शन अपेक्षानुसार नहीं रहा और वे तीसरे स्थान पर finish हुए। इस सीट पर भाजपा के संजय कुमार ने विजयी होने का श्रेय प्राप्त किया, जबकि कांग्रेस के इंद्रदीप चंद्रवंशी दूसरे स्थान पर रहे।

प्रो. सिन्हा को 15,017 वोट मिले, जिससे वे अंतिम परिणाम में तीसरे स्थान पर रह गए। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान उनका भाजपा में शामिल होना राजनीतिक दृष्टि से अनिवार्य रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पटना के शैक्षणिक और मध्यवर्गीय समुदाय में उनकी पहचान को ध्यान में रखते हुए भाजपा इसे अपने पक्ष में सकारात्मक संदेश के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करेगी। इस समय, जन सुराज के लिए यह एक महत्वपूर्ण setback है, क्योंकि पार्टी उपचुनाव में अपनी राजनीतिक शक्ति को दिखाने का प्रयास कर रही है।

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