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’मैसूर का शेर’ टीपू सुल्तान: एक राष्ट्रीय नायक जिसे हिंदूद्रोही साबित करने की हो रही कोशिश – श्रीनिवास

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’मैसूर का शेर’ टीपू सुल्तान

श्रीनिवास

वरिष्ठ पत्रकार , सामाजिक राजनीतिक विश्लेषक
बिहार आंदोलन के सेनानी

इतिहासकार बताते हैं कि ‘मिसाइल’ के निर्माण में टीपू की प्रेरणा रही है. ‘नासा’ के सेंटर में उनकी रॉकेट की तस्वीर लगी है, जिनके आधार पर आधुनिक मिसाइल को डेवलप किया गया! डॉ कलाम ने भी इसका उल्लेख किया है.

टीपू सुल्तान एक राष्ट्रीय नायक थे और हैं! बहादुर, कुशल शासक और स्वाभिमानी. मगर चरम ‘देशभक्त’ टीपू को हिंदूद्रोही, हत्यारा और खलनायक साबित करने पर तुले हैं. उनके लिए महराणा प्रताप और शिवाजी हीरो हैं, सिर्फ इसलिए कि उन्होंने मुगल बादशाहों से संघर्ष किया. उनका सम्मान हम भी करते हैं, मगर इस कारण नहीं; इसलिए कि उन्होंने खुद से कहीं ताकतवर राजाओं के सामने झुकने से इनकार कर दिया! और टीपू सुल्तान उनसे जरा भी कमतर नहीं था.

जब देश के सभी रजवाड़े (हिंदू और मुसलमान) ईस्ट इंडिया कंपनी के आगे घुटने टेक रहे थे, टीपू सुल्तान अड़ गया, कंपनी के भारत विजय में बाधक बना रहा. टीपू ने मराठों और निजाम से मिल कर अंग्रेजों से लड़ने का प्रस्ताव दिया, मगर उनको हिम्मत नहीं पड़ी. अंग्रेजों से साथ मिल गये, टीपू अकेले लड़ा, लड़ते हुए मारा गया. उसके दो बेटों को बंधक बना लिया गया, फिर उनकी हत्या कर दी गयी, लेकिन टीपू ने आत्मसमर्पण नहीं किया! अंग्रेज टीपू से इतना खौफ खाते थे कि टीपू की लाश के करीब जाने से भी डर रहे थे!

यह दुखद और शर्मनाक है कि देश अपने इस सपूत का सम्मान नहीं कर रहा है. अब तो खैर पूरा इतिहास ही बदला जा रहा है! वैसे कर्नाटक में टीपू जयंती पर भव्य समारोह की परंपरा रही है, मगर अब उस आयोजन को हिंदू- मुस्लिम टकराव का बहाना बना दिया गया है.

इतिहासकार बताते हैं कि ‘मिसाइल’ के निर्माण में टीपू की प्रेरणा रही है. ‘नासा’ के सेंटर में उनकी रॉकेट की तस्वीर लगी है, जिनके आधार पर आधुनिक मिसाइल को डेवलप किया गया! डॉ कलाम ने भी इसका उल्लेख किया है.

टीपू सुल्तान फ्रांसीसी क्रांति से प्रभावित थे. नेपोलियन बोनापार्ट को सहायता के लिए पत्र भेजा था. टीपू सुल्तान को मालूम था कि इंग्लैंड और फ्रांस के बीच दूषमनी है! मगर उसी बीच नेपोलियन की पराजय हो गयी! टीपू द्वारा नेपोलियन को पत्र लिखने के आधार पर संघी खेमे के चहेते लेखक विक्रम संवत ने टीपू को देशद्रोही साबित करने का हास्यास्पद प्रयास किया है- टीपू सुल्तान के कारण भारत फ्रांस का गुलाम हो सकता था! इसी तर्क से नेताजी सुभाष बोस पर भी आरोप लग सकता है कि दूसरे विश्व युद्ध में यदि हिटलर जीत जाता तो भारत जर्मनी का गुलाम हो जाता. यह आशंका अकारण नहीं है, लेकिन क्या इस कारण नेताजी को भारत विरोधी कहने का साहस संपत सरल या कोई भी कर सकता है?

टीपू पर एक गंभीर आरोप यह है कि उसने बड़ी संख्या में हिंदुओं की हत्या करवाई, मगर उस काल में राजा/बादशाह गद्दारों को सजा देने में क्रूरता करते ही थे! राज्य बिना क्रूरता के टिक ही नहीं सकते थे! टीपू सुल्तान पर लगे इस आरोप को गलत मानने वालों के मुताबिक कि टीपू ने भी वैसे ही लोगों को सजा दी थी, जो अंग्रेजों की मदद कर रहे थे! सम्राट अशोक अपवाद थे. उन्होंने भी कम हिंसा नहीं की, मगर बाद में बुद्ध की शांति का संदेश फैलाने को ध्येय बना लिया!

सच यह है कि जिन मराठों को आज नायक का दर्जा हासिल है, वे पूरे देश लूटपाट करते थे. शृंगेरी के हिंदू मठ को भी लूटा था! मठ ने टीपू सुल्तान से सहायता मांगी, टीपू ने की भी! हैदर अली ने पहले के हिंदू राजा के समय चलने वाले सिक्कों को बंद नहीं किया, जिन पर हिंदू हिंदू देवी देवताओं के चित्र होते थे! वे कहीं से साम्प्रदायिक नहीं थे!

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