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रोपे पेड़ बबूल के तो आम कहाँ से होय : डॉ. योगेन्द्र का तीखा राजनीतिक विश्लेषण
प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को संसद में बीजेपी के सांसद निशिकांत दूबे ने बार बार अय्याश कहा। किसी ने उसे रोका? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सांसद को समझाया? उस पर कोई कार्रवाई की? अगर नरेंद्र मोदी जी चुनाव जीत कर आये हैं तो नेहरू भी कोई मनोनीत प्रधानमंत्री नहीं थे। प्देश की आज़ादी के लिए नेहरू ने पूरे तेरह वर्ष जेलों में बिताया। उन्होंने विश्व विख्यात किताबें लिखी। ‘भारत की खोज’, ‘मेरी कहानी’ और ‘विश्व इतिहास की झलक’ जैसी किताबें आज भी पढ़ी और समझी जाती है। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाएं, रेलवे, सांस्कृतिक संस्थाएं, न जाने कितने कल-कारख़ाने और योजनाएं-परियोजनाएँ बनाईं। जब निशिकांत दूबे उन्हें अय्याश कहते हैं तो बीजेपी के सांसद ठहाके लगाते हैं। प्रधानमंत्री जी, ये ठहाके भी तो लौट कर आयेंगे ही! आप खुद नेहरू जी की बेवजह खिल्ली उड़ाते रहते हैं। अगर अपने पूर्वजों को आप गाली देते रहेंगे तो आपकी इज़्ज़त कौन करेगा? बबूल के पेड़ रोपने का शौक है तो उसमें आम के फल लगने की कोई संभावना नहीं है।
यह सब देखकर मुझे अष्टावक्र याद आते हैं। अष्टावक्र की देह आठ जगह से टेढ़ी-मेढ़ी थी। वे जब जनक के दरबार में पहुँचे तो उनकी टेढ़ी-मेढ़ी देह देखकर दरबारियों ने ठहाके लगाए। हरेक राजा के दरबारी अक्सर मूर्ख ही होते हैं। न जनक अपवाद थे और न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपवाद हैं। दरबारी हँसते-हँसते थक गए और उनकी हँसी रुक गई तब अष्टावक्र ठहाके लगाने लगे। जनक को आश्चर्य हुआ। उन्होंने अष्टावक्र से पूछा कि यह तो मैं जानता हूँ कि मेरे दरबारी क्यों हँसे, लेकिन आपके हँसने का राज समझ में नहीं आया। अष्टावक्र ने कहा—”राजन्, आपके दरबारी मेरी देह के टेढ़ेपन को लेकर हँसे जिसे मैंने नहीं बनाया। मगर राजन्, बुद्धि अर्जित संपत्ति है। आपके दरबारी चाहते तो थोड़ी-सी बुद्धि अर्जित कर सकते थे, लेकिन इन्होंने अर्जित नहीं किया, इसलिए मैं हँसा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल रात फिर रोने लगे कि मेरी माँ को युवतियों ने गाली दी। गाली देना अच्छी बात नहीं है, लेकिन एक शहीद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की विधवा सोनिया गांधी को जर्सी गाय और कांग्रेस की विधवा कहना कहाँ से सही था? आपकी माँ माँ है तो सोनिया गांधी क्या माँ नहीं है? आपकी पार्टी का आईटी सेल गाली देने के सिवा करता क्या है? आपने कभी रोका? आपने कभी अमित मालवीय को समझाया? आपने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की खिल्ली उड़ाई। आपकी भाषा हर वक्त स्तरहीन हो जाती है। आप प्रधानमंत्री हैं। जब आप स्तरहीन भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और अपनी आईटी सेल से करवा रहे हैं तो अट्ठारह-उन्नीस वर्षीय युवतियों से क्या उम्मीद करें? आपसे ही तो देश प्रशिक्षित हो रहा है। कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों की आलोचना आम लोग भी करते थे लेकिन उन्हें कांग्रेस के लोग गालियाँ नहीं देते थे, लेकिन आज आपकी आलोचना पर गालियों की बौछार हो जाती है।
संसद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने अपमानित किया, जब उसने गोडसे को राष्ट्रभक्त बताया। चैनल पर आपके राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी महात्मा गांधी को अपमानित करते हैं। आपके सांसद रमेश बिधूडी ने सांसद दानिश अली को मुल्ला, ऐय उग्रवादी, आतंकवादी कहा, क्या आपने कोई कार्रवाई की? उसी रमेश बिधूडी को एमएलए का टिकट दिया और अब दिल्ली विधानसभा की शोभा बढ़ा रहे हैं। पिछले बारह वर्षों में पहली बार आपकी ट्रोल आर्मी को युवतियों ने शिकस्त दी है। मशहूर शायर दुष्यंत कुमार ने बहुत वर्ष पहले लिखा था—
“आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख
घर अँधेरा देख तू आकाश के तारे न देख।”
आज घर अँधेरा है और इस अँधेरे को परोसने वाले और कोई नहीं, घर के मुखिया हैं। बेहतर होगा कि सभी अपना मुँह समेट लें, वरना युवा पीढ़ी बकसने वाली नहीं है।
