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Phd Course Exam Scam: परीक्षा में बड़ा खेल! मिथिला विश्वविद्यालय पर गंभीर सवाल
Phd Course Exam Scam: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी नियमों का लगातार उल्लंघन हो रहा है, जिसके चलते अकादमिक माहौल में चिंता बनी हुई है। लोकभवन से लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) तक कई शिकायतें प्राप्त होने के बावजूद विवि प्रशासन की लापरवाही में कोई कमी नहीं आई है।
हाल के मामले में, पैट (पैट) 2023 के पाठ्यक्रम कार्य परीक्षा के परिणामों को बिना किसी नियम और केंद्रीकृत व्यवस्था के, विभाग स्तर पर गोपनीय तरीके से आयोजित कर घोषित किया गया।
यह जानकर हैरानी होती है कि इस परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों को पास कर दिया गया है। जबकि अन्य प्रदेशों के विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद परीक्षा फॉर्म भरवाना, प्रवेश पत्र जारी करना और निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर पारदर्शी तरीके से परीक्षा लेना अनिवार्य है।
इसके विपरीत, मिथिला विश्वविद्यालय में सभी नियमों की अनदेखी करते हुए गोपनीय तरीके से परीक्षा का आयोजन किया गया। इस मामले पर विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों ने गहरी चिंता व्यक्त की है।
प्रो. अखिलेश मिश्रा, डा. प्रभोद कुमार, नितेश चंद्र और अन्य ने उल्लेख किया कि देश के अनेक विश्वविद्यालयों में नियमों के उल्लंघन के चलते पीएचडी की डिग्रियों पर रोक लगाई जा चुकी है, या उन्हें संदेह की नजर से देखा जा रहा है।
इस परिस्थिति में केंद्रीय सतर्कता आयोग और निगरानी विभाग की जांच के बावजूद इस तरह का कदम उठाना चिंता का विषय है। नियमित कोर्सवर्क के छह माह बाद, केवल उन शोधार्थियों को फार्म भरने की अनुमति होती है जिनकी उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम नहीं हो।
परीक्षा में गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संबंधित विभाग के शिक्षकों को परीक्षा प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकता, और न ही उसी विभाग में परीक्षा केंद्र स्थापित किया जा सकता है।
परीक्षा में सफल होने के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त करना आवश्यक है। असफल उम्मीदवारों को अगले सत्र में एक बार फिर से प्रयास करना होगा।तिम मौका दिया जाता है। ऐसी परीक्षा के संबंध में पूछे जाने पर विश्वविद्यालय मीडिया प्रभारी डा. आरएन चौरसिया ने चुपी साध ली। उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
विश्वविद्यालय में पीएचडी में धोखाधड़ी की शिकायतें कोई नई बात नहीं हैं। निगरानी विभाग और केंद्रीय सतर्कता आयोग (शिकायत संख्या 38673/2023) में पहले से कई मामले लंबित हैं।
इन मामलों में 2020, 2021-22 और 2023 के दौरान पैट में हुए अनियमितताओं का आरोप है, जैसे कि एक ही विषय में महज 10 सीटों पर 100 छात्रों का नामांकन, निर्धारित क्षमता से चार गुना अधिक छात्रों का गाइड बनाना, और निजी कॉलेज के अध्यापकों को गाइड के रूप में नियुक्त करना। इसके अलावा, नौकरी में लगे और प्रोबेशन अवधि में रहने वाले शिक्षकों को नियमों के खिलाफ पीएचडी कराने के मामलों को भी उठाया गया है। इस संदर्भ में निगरानी विभाग और सतर्कता आयोग ने विश्वविद्यालय को पत्र जारी करते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
