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JPSC JSSC Student Protest: 20वें दिन भी गतिरोध, मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगे छात्र

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JPSC JSSC Student Protest: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 20वें दिन भी जारी है। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखा है। छात्र नेताओं का कहना है कि कुछ मांगों पर सरकार ने सकारात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन सीबीआई जांच सहित प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

छात्र नेता पीयूष कुमार ने बताया कि पहले दिन से ही आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन छात्रों की एकजुटता ने हर प्रयास को विफल कर दिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी एकता के बल पर ऐसी कोशिशों का सक्रीय उत्तर दिया है। पीयूष कुमार ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि वे इस मामले को संवेदनशीलता से लें और छात्रों की कठिनाइयों को समझें। उम्मीद जताई गई कि मुख्यमंत्री शीघ्र ही छात्रों की बातें सुनेंगे और उनकी मांगों को पूरा करने की दिशा में कदम उठाएंगे।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन में शामिल छात्र केवल विरोध-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि रचनात्मक गतिविधियों का भी आयोजन करेंगे। भीकाजी कामा की पुण्यतिथि के अवसर पर छात्रों द्वारा उन्हें सम्मानित करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करने की योजनाओं का उल्लेख किया गया।

छात्रों की प्राथमिक मांग सीबीआई जांच

अनशन पर बैठे छात्र रूपेश कुमार ने बताया कि छात्रों की सरकार से तीन मुख्य मांगें हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ मांगों को मान्यता देने का आश्वासन दिया है, जिसमें बैकलॉग परीक्षा-25 और 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने का शामिल है।

हालांकि, रूपेश कुमार ने यह स्पष्ट किया कि छात्रों की प्राथमिक मांग सीबीआई जांच है। उनके अनुसार, जब तक सीबीआई जांच शुरू नहीं होती, तब तक आयोग में बैठे भ्रष्ट तत्वों का पर्दाफाश नहीं होगा।श नहीं हो सकेगा।

उन्होंने बताया कि जिन व्यक्तियों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, वे केवल ‘छोटी मछलियां’ हैं, जबकि असली आरोपी अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। उनका कहना है कि छात्रों की मांगें केवल परीक्षा को रद्द करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी अनिवार्य है।

छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्रों की मंत्री के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के साथ दो बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने साझा किया कि छात्रों ने अपने मुद्दों को तार्किक रूप से सरकार के समक्ष रखा है।

रविंद्र ने छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज करने पर सवाल उठाए

उन्होंने यह भी कहा कि इन वार्ताओं में मुख्यमंत्री की भागीदारी आवश्यक है, ताकि वह सीधे छात्रों की बात सुन सकें। उनके अनुसार, इससे एक सकारात्मक संदेश जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से समस्या का समाधान निकालने में मदद मिलेगी।

रविंद्र ने छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज करने पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर प्रशासन मानता है कि कुछ लोग गलत रास्ते पर थे या किसी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल हैं, तो उन लोगों की पहचान कर कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन सभी छात्रों को एकसाथ जिम्मेदार नहीं ठहराना उचित नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, साथ ही छात्रों के प्रति संयम और नैतिकता का प्रदर्शन करना चाहिए। यदि सरकार या प्रशासन की बातें भीड़ तक सही तरीके से नहीं पहुंचतीं, तो इससे छात्रों में आक्रोश उत्पन्न हो सकता है।

राजनीतिक समर्थन के संदर्भ में, रविंद्र ने बताया कि जब भी उन्हें लगा कि आंदोलन का राजनीतिकरण हो रहा है, छात्रों ने खुद को उससे अलग रखा। उनका मानना है कि छात्रों की किसी भी राजनीतिक पार्टी से दुश्मनी नहीं है; वे सभी का नैतिक समर्थन चाहते हैं। प्रारंभिक चरण में कांग्रेस के नेता आंदोलन स्थल पर पहुंचे, जबकि बाद में JMM और BJP से जुड़ें लोग भी आए और उन्होंने अपना नैतिक समर्थन व्यक्त किया।

तीनों छात्र नेताओं के बयानों से यह साफ हो गया है कि छात्रों का आंदोलन अभी खत्म नहीं होने वाला है। परीक्षा संबंधी निर्णयों के साथ-साथ CBI जांच की मांग मुख्य मुद्दा बना हुआ है। इसके अलावा, छात्र सरकार के साथ बातचीत का विकल्प भी बनाए रखना चाहते हैं।

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