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Bihar Panchayat Election 2026: EBC को मिलेगा आरक्षण? आयोग की रिपोर्ट के बाद सीटों का होगा निर्धारण
बिहार पंचायत चुनाव 2026 (Bihar Panchayat Election 2026) में अति-पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के पिछड़ेपन का मूल्यांकन अति-पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा किया जाएगा। इसके आधार पर आयोग, सरकार को आरक्षण के लिए अपनी अनुशंसाएं देगा।
पंचायती राज विभाग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले इस निर्णय की पुष्टि की है। उल्लेखनीय है कि त्रिस्तरीय पंचायतों में कुल 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, जिसमें अकेले ईबीसी के लिए 20 प्रतिशत हिस्सेदारी निर्धारित की गई है।
विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश ने मंगलवार को जानकारी दी कि अति-पिछड़ा वर्ग आयोग को एक समर्पित निकाय के रूप में स्थापित किया गया है। यह आयोग ईबीसी के लिए आवश्यक डाटा एकत्रित करेगा।
ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया को पूरा करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। आयोग अब ईबीसी की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति का अध्ययन करते हुए पंचायत स्तर पर उनके प्रतिनिधित्व का आकलन करेगा।
आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) का एक मजबूत सामाजिक आधार
आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायत चुनाव में ईबीसी के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण किया जाएगा। इसके साथ ही पंचायत चुनाव की प्रक्रिया भी जारी रहेगी।व के लिए आरक्षित और सामान्य सीटों की तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।
बिहार में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) का एक मजबूत सामाजिक आधार है, जिसके चलते यह वर्ग राजनीति में भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। राज्य में ईबीसी की कुल जनसंख्या 112 है। हाल ही में पटना उच्च न्यायालय ने ईबीसी को आरक्षण प्रदान करने के लिए नौकरी और शैक्षणिक संस्थानों के लिए अलग नियम बनाने पर जोर दिया है।
इस परिप्रेक्ष्य में, एक विशेष आयोग द्वारा ट्रिपल टेस्ट को पूरा करने की पहल को ईबीसी आरक्षण को कानूनी रूप से समर्थित करने का एक कदम माना जा रहा है।
ट्रिपल टेस्ट: सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, आरक्षण प्रदान करने के लिए तीन स्तरों पर प्रक्रिया को पूरा करना आवश्यक है। इसमें सबसे पहले पिछड़ेपन की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक समर्पित आयोग का गठन करना शामिल है।
दूसरी प्रक्रिया में, प्रत्येक स्थानीय निकाय में आरक्षण के अनुपात का निर्धारण किया जाता है। तीसरी प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की सीमा निर्धारित सीमा से अधिक न हो।
इंपीरिकल डेटा: इसे क्षणिक या वास्तविक अनुभवों के आधार पर एकत्रित डेटा भी कहा जाता है, जिसे सीधे तौर पर प्र…रयोगों, अवलोकन या वास्तविक अनुभवों के माध्यम से इकट्ठा किया जाता है। यह किसी काल्पनिक सिद्धांत या केवल तर्क पर आधारित नहीं होता, बल्कि इसे ठोस साक्ष्यों द्वारा सिद्ध किया जा सकता है।
