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गढ़ महोबे की लड़ाई अंजाम तक पहुंचेगी? डॉ. योगेन्द्र यादव ने बीजेपी, चुनाव आयोग और मोदी सरकार पर उठाए गंभीर सवाल
जंतर- मंतर पर कोई शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहता है तो सरकार को दिक़्क़त क्या है? अगर लाठी, तलवार और कट्टा लेकर कोई बैठ जाए तो अलग बात है। ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र की बुनियाद को बर्बाद करने का सिद्ध आरोप है । योगेन्द्र यादव, प्रशांत भूषण, अंजली भट्टाचार्य, दीपंकर भट्टाचार्य के साथ हज़ारों लोग शांतिपूर्ण प्रतिरोध के लिए पहुँचे तो कौन सा गुनाह कर दिया? कांग्रेसी सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं तो पानी की बौछार कर रहे हैं । आश्चर्य है कि प्रधानमंत्री एक मंदिर में खंजडी बजा रहे हैं । बेशर्मी अगर सीखना है तो बीजेपी के नेताओं से सिखिए । उन्हें वोट चुराना है, फूफा- मामा करना है, हिन्दुओं की कमजोर नसों को सहलाना है, सत्ता का सुख लूटना है। हज़ारों करोड़ तो अपनी विदेश यात्रा में फूँक दिया । चाय बेचने वाले का पेट नहीं भर रहा। चाय बेचने का स्वाँग भरने वाला देश बेच रहा है। जो उनके समर्थक हैं, क्या उनकी आँखें फूटी हैं या दिमाग़ को दीमक चाट गया है? शांतिपूर्ण आंदोलन का अधिकार जनता को संविधान ने दिया है । उस पर बर्बरता का क्या मतलब है?
जंतर मंतर पर आंदोलनकारियों को बिना बैज वाला सिपाही घसीट रहा है । गृह मंत्रालय अंधा है क्या? संसद मार्च में भी सफेद कपड़ों में लाठीधारी थे। गृह मंत्री अमित शाह बता नहीं सके कि ऐसे लाठीधारियों को किसने नियुक्त किया था? प्रदर्शनकारियों पर लाठी बरसाने की इजाज़त किसने दी? गजब का राज है। चेहरे पर से सारे नक़ाब उतार दिया है । इंडियन टाइम्स की रिपोर्ट का जवाब चुनाव आयोग नहीं दे रहा। दोयम दर्जे के बीजेपी नेता सिर्फ़ घटिया बयानबाज़ी कर रहे हैं । मान लिया राहुल गांधी को कोई बुद्धि नहीं है, तुम्हारे अंदर कूट कूटकर भरी है तो बताओ न कि तुम्हारे द्वारा नियुक्त दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्ति सही है या गलत? सवालों के जवाब नहीं और जीभ बत्तीस इंच की।
क़र्ज़े से देश को पाट दिया । युवाओं के रोज़गार छीन लिए, ऐसा सिस्टम बनाया । देश की संपत्ति अपने मित्रों को दे दी। अपने मंत्रियों के मुँह पर ताला लगा दिया । बबुआ अध्यक्ष ले आये। सभी संवैधानिक संस्थाओं की लुगदी बना दी।खुद खंजडी पर उतर आए । ईमानदारी का यह आलम है कि अपनी डिग्री तक दिखा नहीं पा रहे। हिन्दू धर्म को तहस नहस कर दिया । पंद्रह वर्षों में एक बार भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं कर पाए । दूसरों को अपशब्द बकते रहे और झूठी सहानुभूति हासिल करने के लिए माँ को बार बार राजनीतिक इस्तेमाल करते रहे। प्रधानमंत्री को भ्रम है कि वे कुछ भी करेंगे, जीतते रहेंगे । इसलिए देश की समस्याओं से जूझना नहीं है। ताली और थाली पीटकर देश को मूर्ख बनाते रहना है । लेकिन यह सिलसिला लगातार चलेगा नहीं । चाहे ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न दे दो या पद्म भूषण । असम के मुंहफट मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न और बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष पद्म भूषण मांग रहे हैं । कम से कम बीजेपी यह तो तय कर ले कि क्या देना है? विपक्ष ने तो उनके लिए तिहाड़ की कोठरी तय कर रखी है। जब तक शासन में हैं, तब तक उन्हें कुछ दे दें। उन्होंने देश की सत्ता सौंपी है । उनके ऋण से बीजेपी को मुक्त भी होना है।
