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Medical Science New Technology, सेंसर बताएगा नसों का हाल; पटना में वैज्ञानिकों ने पेश की रिसर्च

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Medical Science New Technology: अब न्यूरोलॉजिकल रोगों से प्रभावित मरीजों के इलाज में केवल डॉक्टर की निगरानी ही नहीं रहेगी। एक नवीनतम सेंसर मशीन आपकी हर गतिविधि को मापेगी और बताएगी कि आपकी नसों में कितनी मजबूती बाकी है।

जब मरीज इस सेंसर मशीन पर चलेंगे, तो वह उनके कदमों की गति, लंबाई और समय को रिकॉर्ड करके दोनों पैरों की चाल में भिन्नता और असंतुलन की एक रिपोर्ट बनाएगी।

यह मशीन यह भी बताएगी कि दोनों पैरों पर कितना वजन पड़ रहा है, संतुलन में कहाँ गड़बड़ी हुई है, हाथ-पैर की गतिविधियों में कितना सुधार हुआ है, चलने में कोई लड़खड़ाहट या कमजोरी है या नहीं। इन जानकारियों से डॉक्टरों को मरीज की स्थिति बेहतर समझ में आएगी। इसके आधार पर, प्रत्येक मरीज के लिए अधिक प्रभावी फिजियोथेरेपी तकनीक अपनाई जा सकेगी।

रविवार को आइजीआइएमएस के सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट और योग इंचार्ज डॉ. रत्नेश चौधरी तथा न्यूरो फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अविनाश कुमार ने दिल्ली में आयोजित विश्व फिजियोथेरेपी कांफ्रेंस में कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं।

कांफ्रेंस में 50 से अधिक देशों के 10,000 से ज्यादा फिजियोथेरेपिस्ट

इस कांफ्रेंस में 50 से अधिक देशों के 10,000 से ज्यादा फिजियोथेरेपिस्ट, चिकित्सक, वैज्ञानिक और छात्र भाग ले रहे हैं। इसमें 1853 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र और पोस्टर प्रस्तुत किए गए हैं।

वैज्ञानिक सत्रों में ऑस्ट्रेलिया, हांगकांग, सिंगापुर, जापान, म्यांमार, कनाडा और अमेरिका सहित कई देशों के विशेषज्ञों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए।

डॉ. रत्नेश चौधरी और डॉ. अविनाश कुमार का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ फिजियोथेरेपी और आइसीयू रिहैब की मांग में वृद्धि होगी। कांफ्रेंस में टेली-रिहैब, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और होम-आइसीयू जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इन तकनीकों की सहायता से घर पर रह रहे मरीजों की गतिविधियों की निगरानी करने और उनके अनुसार फिजियोथेरेपी की योजना बनाना सरल होगा।

उन्होंने कहा कि हड्डी-दर्द, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों, मोटापे और फिटनेस के क्षेत्र में फिजियोथेरेपी की भूमिका दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। रोबोटिक थेरेपी, वर्चुअल रियलिटी, इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और टेली-रिहैबिलिटेशन जैसी नई तकनीकें न्यूरो रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में अहम योगदान दे रही हैं। बिहार से डॉ. हेमेन्दु, डॉ. वैभव, डॉ. अपराजिता, डॉ. अपेक्षा, डॉ. कोमल और डॉ. सुमन समेत अन्य विशेषज्ञ भी इस चर्चा में शामिल हुए।

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