Sen your news articles to publish at [email protected]
Gujarat 1870 Crore Fake Donation: अनजान राजनीतिक दलों को पर पुलिस ने की FIR
Gujarat 1870 Crore Fake Donation: गुजरात पुलिस ने आयकर विभाग की शिकायत के आधार पर राज्य के तीन गैर-मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड राजनीतिक दलों के खिलाफ अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। इन दलों पर आरोप है कि उन्होंने लगभग 1870 करोड़ रुपये के फर्जी राजनीतिक चंदे का सहारा लेकर सरकारी खजाने को करीब 560 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष राजस्व का नुकसान पहुँचाया।
गांधीनगर के क्राइम इंवेस्टीगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं जैसे धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, दस्तावेजों की जालसाजी और जाली दस्तावेजों के प्रयोग के तहत यह कार्रवाई की है। इन मामलों में केवल तीन राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि कुल 15 मुख्य पदाधिकारियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को भी नामजद अभियुक्त घोषित किया गया है।
तीनों दलों की जमीन पर कोई वास्तविक राजनीतिक गतिविधि मौजूद नहीं
आयकर कानून की धारा 80GGC के अंतर्गत किसी भी पंजीकृत राजनीतिक दल को दिए गए दान पर करदाताओं को 100% आयकर छूट प्राप्त होती है। परंतु, आयकर विभाग की विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इन तीनों दलों की जमीन पर कोई वास्तविक राजनीतिक गतिविधि मौजूद नहीं थी। दरअसल, इनका गठन केवल कमीशन के बदले चंदे का पैसा लौटाने के लिए एक ढोंग के रूप में किया गया था।
इस समस्त प्रक्रिया में, करदाताओं से चेक या आरटीजीएस के माध्यम से पार्टी को औपचारिक दान लिया जाता था, और इसके बदले उन्हें कानूनी छूट का दावा करने के लिए रसीदें प्रदान की जाती थीं।
इसके तुरंत बाद, यह धनराशि जय राम एंटरप्राइजेज, किसान एंटरप्राइजेज, जे ट्रेडिंग, काजल एंटरप्राइजेज और परमार एसोसिएट्स जैसी फर्जी और शेल कंपनियों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी जाती थी।
इन कंपनियों के नाम पर खाद्य पदार्थों और अन्य सामान की झूठी खरीद-बिक्री के फर्जी बिल बनाए जाते थे। इसके बाद, बैंक से नकद राशि निकाली जाती थी। अंत में, आरोपी दल 2 से 10 प्रतिशत तक का अपना कमीशन निकालकर शेष पूरी रकम करदाताओं को कैशबैक के रूप में वापस लौटा देते थे।
फर्जीवाड़े में शामिल तीनों दलों का वित्तीय ब्योरा
| राजनीतिक दल | कथित चंदा राशि | सरकार को टैक्स का नुकसान | नामजद मुख्य आरोपी |
|---|---|---|---|
| भारतीय नेशनल जनता दल (BNJD) | ₹1,143.85 करोड़ | करीब ₹343 करोड़ | पार्टी अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार वी. गजेरा (मास्टरमाइंड), महासचिव विपुल सोलंकी, कोषाध्यक्ष रौनकसिंह चावड़ा, सीए आदिल सैयद |
| स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी (SAP) | ₹519 करोड़ | करीब ₹155 करोड़ | मेहुल कुमार खत्री, सुरेंद्रसिंह पी. तिवारी, सीए मुकुंदभाई सी. राठौड़ |
| गरीब कल्याण पार्टी (GKP) | ₹206.76 करोड़ | करीब ₹62 करोड़ | अध्यक्ष नीरज कुमार क्षत्रिय, धनंजय सिंह राजपूत, धीरज कुमार क्षत्रिय, अविनाश तिवारी, प्रदीप सिंह परिहार और 3 सीए (कुलदीप चंदन, अशोककुमार शाह, पंकज अग्रवाल) |
चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ये तीनों राजनीतिक दल 2017 से गुजरात में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारते आ रहे हैं, लेकिन इनका प्रदर्शन पूरी तरह से नगण्य रहा है।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 158 के अनुसार, यदि कोई प्रत्याशी कुल वैध मतों का 1/6 यानी लगभग 16.67% विजय प्राप्त नहीं करता, तो उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाती है। अब तक, इन तीनों दलों के हर उम्मीदवार की जमानत को जब्त किया जा चुका है।
उदाहरण के लिए, पूरे गुजरात में बीएनजेडी का वोट शेयर मात्र 0.01% के आसपास रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के संस्थापक वी.एम. गजेरा को अमरेली सीट से केवल 322 वोट मिले थे।
दलों का राजनीतिक प्रभाव न के बराबर
इसी तरह, गरीब कल्याण पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार किए थे, जिसमें आनंद लोकसभा सीट पर पार्टी के प्रत्याशी धीरजकुमार क्षत्रिय को सिर्फ 1,747 वोट (0.15%) प्राप्त हुए थे। यह दर्शाता है कि इन दलों का राजनीतिक प्रभाव न के बराबर था। और इनका प्राथमिक मकसद केवल वित्तीय हेराफेरी था।
गुजरात पुलिस के एक उच्च-ranking अधिकारी के अनुसार, आयकर विभाग ने दो साल पहले इन संदिग्ध समूहों के ठिकानों पर छापेमारी की थी और पिछले एक साल से इनकी वित्तीय फाइलों की गहन जांच कर रहा था।
आधिकारिक शिकायतों और सबूतों के आधार पर, पुलिस अब तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्रित कर रही है। इसमें नकली डिजिटल हस्ताक्षरों और निर्वाचन आयोग को प्रस्तुत किए गए जाली फॉर्म 24A की जांच शामिल है।
पुलिस अब इस सिंडिकेट से जुड़े सभी पार्टी कार्यकर्ताओं, अधिकारियों और सहयोगियों के ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की योजना बना रही है। जांच के पूरा होने तक, आरोपियों के सभी संबंधित बैंक खातों को फ्रीज़ करने और उनकी अचल संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इसके अतिरिक्त, अवैध धन से अर्जित संपत्तियों को भी अटैच किया जाएगा, ताकि अदालत में एक मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके।
