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देश की राष्ट्रीय बीमारी- कोढ़ में खाज: डॉ. योगेन्द्र की तीखी राजनीतिक टिप्पणी
देश की राष्ट्रीय बीमारी- कोढ़ में खाज
दिवंगत बाप को बीच में नहीं लाना चाहिए। सही बात है। जो दिवंगत हो गए, उन्हें बीच में क्यों लाना? नेहरू जी और इंदिरा गांधी दिवंगत नहीं हैं, उनको बीच में लाना है। किसी के दिवंगत बाप का कोई इतिहास नहीं है, लेकिन बाप तो है। आज़ादी की लड़ाई लड़ी थी। वे लड़ाई लड़ते हुए दिवंगत हो गए। उन्हें बीच में लाकर खडगे जी ने बहुत बड़ा पाप किया। मोदी जी और अमित शाह पुण्यात्मा आदमी है। वे जो कुछ बोलेंगे, वह शबाब की बोली होगी। पुण्य झड़ता रहेगा। देश लहालोट होगा। वे कुछ भी बोल सकते हैं। संवैधानिक पद पर हैं। उन्हें बोलने का लाइसेंस मिला हुआ है। उनके सामने किसी बाप, किसी की दादी, किसी का नाना कोई मायने नहीं रखता।
तीस वर्ष तक भिक्षा मांग कर खाया
वे किसी भी स्त्री के खिलाफ टिप्पणी कर सकते हैं। मीडिया उनकी प्रार्थना करेगी। देश के इतिहास में वे पहले आदमी हैं जो संवैधानिक पद पर हैं। इसके अलावे कोई भी आदमी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, न थे। नेहरू क्या थे? आज़ादी की लड़ाई में तेरह साल जेल में रह गए तो क्या तीसमार ख़ाँ हो गये? वर्तमान प्रधानमंत्री ने भी घड़ियाल की सवारी की है। तीस वर्ष तक भिक्षा मांग कर खाया है। मामूली बात है? आज़ादी की लड़ाई कोई लड़ाई थी? उसे तो कोई भी लड़ सकता था। है किसी को हिम्मत कि तीस साल तक गली गली फिर कर भिक्षा मांगे।
नेहरू अपने को समझते क्या हैं? दो चार किताबें लिख दी तो क्या तुर्रम ख़ाँ हो गए? लोग कहते हैं कि विदेशों से पढ़कर आये थे। ख़ाक पढ़कर आये? हमारे प्रधानमंत्री ऐसे कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़े कि वे धरती पर ही नहीं हैं । स्वर्ग से पढ़कर आये हैं। किताब लिखने में कौन सी बहादुरी है? जिन्ना ने तो कोई किताब नहीं लिखी। एक पर्चा तक नहीं लिखा। एक देश ही बना लिया और उसका कायदे आज़म बन बैठा। नेहरू क्या थे ? पूरे बेवकूफ थे। देश के लिए एम्स और आईआईटी बनाते रहे। क्या जरूरत है इसकी?
देश में भक्तों की कमी नहीं
जब देश में भगवान मौजूद हैं। भगवान को घर दो। उसके सामने लाखों दीपक जलाओ। श्रद्धालुओं को कहो- मैंने तुम्हारे भगवान का उद्धार किया है। श्रद्धालु प्रसन्न होकर चंदा देंगे । हम उस चंदे से अपना घर सजायेंगे । भारत मंदिरों का देश है, इसे स्कूल, कॉलेज और अस्पताल क्यों चाहिए? इसलिए वर्तमान प्रधानमंत्री का एकसूत्री कार्यक्रम है कि जो बना हुआ है, उसे बेचो। मंदिर मंदिर घूमो। देश में भक्तों की कमी नहीं है।
सिरफिरे लोगों की देश में कमी नहीं है। उसने भारत की राजनीति को माँ, बाप, कांग्रेस की विधवा, पचास लाख का गर्ल फ्रैंड, जर्सी गाय पर टिका दिया है। उन्हें बात बात में अपनी इज़्ज़त प्यारी लगती है और राष्ट्र की इज्जत उतारने में उन्हें गर्व होता है। असल बेइज्जती क्या होती है , यह उन किसानों और युवाओं से पूछो जो जीने से बेहतर गले में फाँसी लगाना समझते हैं।
आई टी सेल की पूरी जमात गाली देने पर ही तुली
रोहित वेमुला जैसे हज़ारों छात्रों से पूछो जिन्हें शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव झेलते हैं और वे तमाम गालियाँ सुनते हैं जो समाज में वर्जित है। करोड़ों लोगों से जाकर पूछो जिनकी देह छूने मात्र से लोग अशुद्ध हो जाते हैं। खाये पीये अघाये लोग जिन्होंने देश को तबाह कर दिया है, उन्हें अपनी फर्जी इज्जत चाहिए। जिनके प्रवक्ता टीवी पर माँ बहन करते हैं और वे उन्हें बनाये रखते हैं।
आई टी सेल की पूरी जमात गाली देने पर ही तुली है। प्रदर्शन में जो अपनी गुंडा सेना भेज कर लड़कियों के साथ अभद्र और अश्लील व्यवहार करवा रहे हैं, वे अपने को इज़्ज़तदार मानते हैं। इज्जत बेचारी गली गली बौख रही है।
